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शिवराज सिंह चौहान-विवेक तन्खा विवाद खत्म, सुप्रीम कोर्ट में हुआ समझौता

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील महेश जेठमलानी ने कोर्ट को बताया कि पार्टियों ने संसद में मुलाकात के बाद अपने मतभेद सुलझा लिए हैं।

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भोपाल

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Manish Geete

Feb 03, 2026

shivraj singh chauhan vivek tankha defamation case settlement supreme court

शिवराज सिंह चौहान और विवेक तन्खा में समझौता होने के बाद अब मानहानि केस समाप्त हो गया। विजुअल-पत्रिका

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एवं सीनियर वकील विवेक तन्खा के बीच कई वर्षों से चला आ रहा मानहानि का विवाद अंततः खत्म हो गया है। दोनों पक्षों में समझौते के बाद मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एमएम सुंदरेश और एनके सिंह की बेंच के समक्ष इस संबंध में रिकार्ड दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि इस मामले में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के अलावा पूर्व गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह और वीडी शर्मा भी पक्षकार थे।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच ने दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को रिकार्ड में लिया है। कोर्ट ने मंगलवार 3 फरवरी 2026 को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की याचिका का निपटारा कर दिया है। पिछले साल ही दोनों पक्षों को कोर्ट ने सलाह दी थी कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से मामले को सुलझाने का प्रयास करें।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील महेश जेठमलानी ने कोर्ट को बताया कि पार्टियों ने संसद में मुलाकात के बाद अपने मतभेद सुलझा लिए हैं। जेठमलानी ने कहा कि हमें अदालत को यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मेरे मुवक्किल और तन्खा संसद में मिले और प्रकरण सुलझा लिया है। विवेक तन्खा मानहानि का अपना सिविल मुकदमा और आपराधिक शिकायत दोनों वापस ले लेंगे।

2021 का मामला है

मामला 2021 का है। मध्यप्रदेश में पंचायत चुनावों का दौर था। उस समय कांग्रेस नेता विवेक तन्खा सीनियर वकील के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में पंचायत चुनावों में ओबीसी रिजर्वेशन से जुड़े एक मामले के लिए कोर्ट में पेश हुए थे। उस समय मुख्यमंत्री रहते हुए शिवराज सिंह चौहान ने इसे लेकर कुछ बयान दिए थे। इस पर विवेक तन्खा ने आरोप लगाया था कि शिवराज सिंह चौहान ने पंचायत चुनावों पर रोक के लिए उन्हें दोषी ठहराया। ऐसा करने के लिए उन्होंने कोर्ट के अंतरिम आदेशों को गलत तरीके से पेश किया।

तन्खा का कहना था कि इन बयानों से उनकी छवि को नुकसान हुआ। उन्हें सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा। इसे आधार बनाते हुए उन्होंने सिविल और क्रिमिनल मानहानि केस दर्ज करवा दिया था। सिविल केस में 10 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की गई थी। जबकि आपराधिक शिकायत में आईपीसी की धारा 500 के तहत कार्यवाही की मांग की थी।

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