Petrol- रोजाना 175 टैंकरों की जरूरत, शहर पहुंच रहे सिर्फ 155 से 160 टैंकर, भुगतान फिर भी कंपनियों ने रोकी सप्लाई, पेट्रोल पंप ड्राय होने से उपभोक्ता इधर उधर भटक रहे
Petrol- एमपी में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई चेन प्रभावित होने से ईंधन का संकट गहराने लगा है। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के अधिकांश इलाकों में कई पेट्रोल पंप 'ड्राई' (ईंधन खत्म) होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। पंप संचालकों का आरोप है कि तेल कंपनियां अब ईंधन के लिए पहले ही एडवांस भुगतान करवा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद समय पर पेट्रोल-डीजल की डिलीवरी नहीं की जा रही है। टैंकरों के देरी से पहुंचने के कारण पंपों पर ईंधन खत्म हो जाता है और नया स्टॉक आने तक उपभोक्ताओं को परेशान होना पड़ता है। पेट्रोल के लिए गुरुवार को वाहन चालक परेशान होते रहे। आमजन ने अपनी पीड़ा भी व्यक्त की।
शहर के पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइन में खड़े ग्राहकों ने बताया कि दाम में इजाफा होने की आशंका से कंपनियां अपना स्टॉक जानबूझकर कम सप्लाई कर रही हैं। जनता पर महंगाई की मार के साथ आम दिनों की जरूरतें पूरी नहीं कर पाने की मजबूरी भी थोपी जा रही है।
रमेश कुमार ने बताया कि पंपों पर चक्कर काटने के बाद तीसरे पंप पर आधा घंटा लाइन में लगना पड़ा। पेट्रोल न मिलने से काम पर जाने में देरी हो गई। किसान सतीश यादव के अनुसार ट्रैक्टर के लिए डीजल लेने आया था, लेकिन पंप बंद मिला। कंपनियों को समय पर तेल देना चाहिए, खेती का सीजन प्रभावित हो रहा है।
यदि कोई पेट्रोल पंप पर 5000 रुपए से अधिक का पेट्रोल या दस हजार रुपए से अधिक का डीजल खरीदता है तो उसे वैध कारण बताना होगा। यदि उसका उद्देश्य औद्योगिक- व्यवसायिक है तो फिर उसे पेट्रोलियम पंप से नहीं दिया जाएगा। गुरुवार को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की ओर से पेट्रोल पंप संचालकों से पेट्रोलियम की स्थिति पर बैठक में ये तय किया गया। गौरतलब है कि औद्योगिक उद्देश्य वाले डीजल की कीमत में 50 रुपए तक की बढ़ोतरी की है। यहां बैठक में पेट्रोल पंप संचालकों ने बताया कि पंप पर सस्ते पेट्रोल की वजह से औद्योगिक उपयोग वाले बल्क में डीजल लेने पहुंच रहें। इससे आमजन को पेट्रोल- डीजल में कमी हो सकती है। इसपर खाद्य अफसरों ने बल्क में खरीदी करने वालों से कारण पूछने के निर्देश दिए।
कंपनियों का दावा: ईंधन की कोई किल्लत नहीं
तेल कंपनियों के अधिकारियों ने ईंधन की कमी के दावों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कोई किल्लत नहीं है और पहले के मुकाबले सप्लाई को और बढ़ाया गया है। गुरुवार को इंडियन ऑयल के जेल पहाड़ी स्थित कार्यालय में एचपीसीएल, बीपीसीएल और इंडियन ऑयल के अधिकारियों की पेट्रोल पंप डीलर्स के साथ एक बैठक भी हुई। इसमें कंपनियों ने साफ किया कि सप्लाई चेन में कोई समस्या नहीं है और पंप बंद होने के अन्य व्यावसायिक कारण हो सकते हैं।
बढ़ोतरी के बाद भी घाटा: अकेले भोपाल जिले में जहां रोजाना 175 टैंकर डीजल-पेट्रोल की जरूरत होती है, वहीं वर्तमान में केवल 155 से 160 टैंकर ही पहुंच पा रहे हैं। इस समय देश में उद्योग पूरी क्षमता से चल रहे हैं और कृषि कार्य भी जारी है, जिससे कमर्शियल व सामान्य डीजल की मांग काफी बढ़ गई है।
जिम्मेदारों के बयान
मप्र पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह बताते हैं कि जितनी डिमांड हो रही है, उस हिसाब से डीजल-पेट्रोल की सप्लाई नहीं हो रही है। रेट बढऩे के बाद भी कंपनियों को घाटा होने से सप्लाई प्रभावित है। समय पर टैंकर न मिलने से 20 फीसदी पंप रोजाना ड्राई हो रहे हैं। इधर एचपीसीएल के रीजनल मैनेजर कपिल राय के अनुसार डीजल-पेट्रोल की कोई किल्लत नहीं है, सामान्य रूप से सप्लाई जारी है। पंप बंद होने के पीछे डीलर्स के दूसरे कारण हो सकते हैं। यह बात हमने डीलरों को भी बता दी है।
पेट्रोल-डीजल की कमी और बढ़ती कीमतों के बीच 'कारपूलिंग' एक प्रभावी विकल्प है। एक ही रूट पर जाने वाले लोग निजी वाहनों के बजाय एक गाड़ी साझा कर सकते हैं। इससे ईंधन की व्यक्तिगत खपत कम होती है, पैसों की बचत होती है और सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव भी घटता है।