कहीं साल में दो बार तो कहीं किसी के जन्म दिन और किसी देश में किसी की पुण्य तिथि पर मनाया जाता है TECHERS DAY....इन्हें भारत
भोपाल। कबीरदास द्वारा लिखी गई गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पांव, बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय पंक्तियां जीवन में गुरु के महत्व को बखूबी दर्शाती हैं। भारत में प्राचीन समय से ही गुरु व शिक्षक परंपरा चली आ रही है। गुरुओं की महिमा का चित्रण ग्रंथों में भी मिलता है। जीवन में माता-पिता का स्थान कभी कोई नहीं ले सकता, उनका ऋण हम किसी भी रूप में नहीं उतार सकते। लेकिन हमें समाज के बीच रहने योग्य हमारे शिक्षक बनाते हैं। हमारे सफलता की इबारत का जिम्मा उन्हीं की रखी नींव उठाती है। भारत में हर साल पांच सितम्बर को ही शिक्षक दिवस मनाया जाता है। पर क्या आप जानते हैं ये दिन कैसे अस्तित्व में आया और 5 सितम्बर ही क्यों...ऐसे कई रोचक फैक्ट जानने के लिए जरूर पढ़ें ये खबर...
* हम बात कर रहे हैं महान शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की। 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुपति गांव में जन्में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को एक महान राजनीतिज्ञ और दार्शनिक भी कहा जाता है। शिक्षा के क्षेत्र में भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले डॉ. राधाकृष्णन एक महान शिक्षक होने के साथ-साथ आजाद भारत के पहले उपराष्ट्रपति तथा दूसरे राष्ट्रपति थे। शिक्षा और राजनीति में उत्कृष्ट योगदान देने वाले डॉ. राधाकृष्णन को उनकी महानत के लिए ही 1954 में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था।
* इस दिन स्टूडेंट्स मनाना चाहते थे डॉ. राधाकृष्णन का जन्मदिन
आपको बता दें कि एक समय में 5 सितंबर भारत के लिए कोई विशेष दिन नहीं था। बल्कि ये दिन सिर्फ उनके लिए स्पेशल होता था जो डॉ. राधाकृष्णन के स्टूडेंट थे। एक बार इन्हीं स्टूडेंट्स ने उनसे उनका जन्म दिन मनाने का आग्रह किया। ये सुनकर डॉ. राधाकृष्णन ने अपने जन्म दिन को स्वयं का दिन बनाने के बजाय संपूर्ण शिक्षकों के महान कार्यों और उनके योगदान के लिए सम्मानित करने का दिन बनाने का सुझाव दे दिया। उन्होंने स्टूडेंट्स से कहा कि शिक्षक ही देश के भविष्य का आधार होते हैं, इसलिए सिर्फ उन्हें नहीं बल्कि हर शिक्षक को सम्मान दो। यही वो दिन था जबसे ५ सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
जानें एक महान शिक्षक के बारे में ये रोचक फैक्ट्स
पहली बार 1962 में मनाया गया था शिक्षक दिवस
* 1962 में पहली बार ५ सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया गया। तब से आज तक हर साल इसी दिन शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
* डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान शिक्षक थे जिन्होंने अपने जीवन के 40 वर्ष अध्यापन को दिए।
* उन्हें विद्यार्थियों के जीवन में शिक्षकों के योगदान और भूमिका के महत्व के लिए जाने जाते हैं।
* वे आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार से थे।
* पढ़ाई-लिखाई में उनकी बेहद रुचि थी।
* राधाकृष्ण ने 12 साल की उम्र में ही बाइबिल और स्वामी विवेकानंद के दर्शन का अध्ययन कर लिया
था।
* राधाकृष्णन की प्रारंभिक शिक्षा तिरुवल्लुर के गौड़ी स्कूल और तिरूपति मिशन स्कूल में हुई।
* इसके बाद उन्होंने मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की।
* 1902 में मैट्रिक स्तर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और छात्रवृत्ति भी प्राप्त की।
* डॉ. राधाकृष्णन ने 1916 में दर्शन शास्त्र में एम.ए. किया और मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज में इसी विषय के सहायक प्राध्यापक का पद संभाला।
* वह 1931 से 1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे।
* इसके बाद 1936 से 1952 तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर रहे।
* 1939 से 1948 तक वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर रहे।
* उन्होंने भारतीय संस्कृति का गहन अध्ययन किया।
* उन्होंने देश में बनारस, चेन्नई, कोलकाता, मैसूर जैसे कई प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों तथा विदेशों में लंदन के ऑक्सफोर्ड जैसे विश्वविद्यालयों में दर्शनशास्त्र पढ़ाया।
* अध्यापन पेशे के प्रति अपने समर्पण की वजह से उन्हें अपने बहुमूल्य सेवा की पहचान के लिए 1949 में विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति कमीशन के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया।
* 1952 में उन्हें भारत का प्रथम उपराष्ट्रपति बनाया गया और भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बनने से पहले 1953 से 1962 तक वह दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति थे।
* इसी बीच 1954 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उन्हें 'भारत रत्न' की उपाधि से सम्मानित किया।
* डॉ. राधाकृष्णन को ब्रिटिश शासनकाल में 'सर' की उपाधि भी दी गई ।
* इसके अलावा 1961 में इन्हें जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन द्वारा 'विश्व शांति पुरस्कार' से भी सम्मानित किया गया।
* 1962 से शिक्षक दिवस के रूप में 5 सितंबर को मनाने की शुरुआत हुई।
* अपने महान कार्यों से देश की लंबे समय तक सेवा करने के बाद 17 अप्रैल 1975 को इनका निधन हो गया।
इनके लिए भारत बना प्रेरणा
गुरु शिष्य परम्परा को देखते हुए ही दुनिया के दूसरे देशों ने शिक्षकों के सम्मान के लिए विशेष दिवस मनाने शुरू किए। भारत में जहां ५ सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। वहीं अलग-अलग देशों में इस दिन की तारीख अलग-अलग है। कुछ देशों में इस दिन अवकाश रहता है तो कहीं-कहीं यह कामकाजी दिन ही रहता है। जानें किस देश में कब और कैसे मनाया जाता है शिक्षक दिवस...
* भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस का आयोजन किया जाता है।
- भारत में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के सम्मान में 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस दिन देश के द्वितीय राष्ट्रपति रहे राधाकृष्णन का जन्मदिवस होता है।
* यूनेस्को ने 5 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस घोषित किया था। ५ अक्टूबर 1994 से ही इसे मनाया जा रहा है।
- शिक्षकों के प्रति सहयोग को बढ़ावा देने और भविष्य की पीढिय़ों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षकों के महत्व के प्रति जागरूकता लाने के मकसद से इसकी शुरुआत की गई थी।
* चीन में 1931 में नेशनल सेंट्रल यूनिवर्सिटी में शिक्षक दिवस की शुरुआत की गई।
- चीन सरकार ने 1932 में इसे स्वीकृति दी।
- बाद में 1939 में कन्फ्यूशियस के जन्मदिवस, 27 अगस्त को शिक्षक दिवस घोषित किया गया, लेकिन 1951 में इस घोषणा को वापस ले लिया गया।
- इसके बाद सन 1985 में 10 सितंबर को शिक्षक दिवस घोषित किया गया। अब चीन के ज्यादातर लोग चाहते हैं कि कन्फ्यूशियस का जन्मदिवस ही उनका शिक्षक दिवस हो।
* अमेरिका में मई के पहले पूर्ण सप्ताह के मंगलवार को शिक्षक दिवस घोषित किया गया है और वहां सप्ताहभर इसके आयोजन होते हैं।
* रूस में 1965 से 1994 तक अक्टूबर महीने के पहले रविवार के दिन शिक्षक दिवस मनाया जाता रहा। साल 1994 से विश्व शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को ही मनाया जाने लगा।
* थाइलैंड में हर साल 16 जनवरी को राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यहां 21 नवंबर, 1956 को एक प्रस्ताव लाकर शिक्षक दिवस को स्वीकृति दी गई थी।
- पहला शिक्षक दिवस 1957 में मनाया गया था।
- इस दिन यहां स्कूलों में अवकाश रहता है।
* ईरान में वहां के प्रोफेसर अयातुल्लाह मोर्तेजा मोतेहारी की हत्या के बाद उनकी याद में दो मई को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
* मोतेहारी की दो मई, 1980 को हत्या कर दी गई थी।
* तुर्की में 24 नवंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
- वहां के पहले राष्ट्रपति कमाल अतातुर्क ने यह घोषणा की थी।
* मलेशिया में इसे 16 मई को मनाया जाता है। वहां इस खास दिन को हरि गुरु कहकर संबोधित किया जाता है।