जुलाई से बेरोजगारी झेल रहे अतिथि विद्वान, लाल स्याही से पोस्टकार्ड लिखकर जता रहे विरोध
भोपाल। तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाने वाले अतिथि विद्वान शासन की नीतियों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। दरअसल, वर्ष 2017 में उच्च शिक्षा विभाग के अतिथि विद्वानों को प्रतिदिन 1500 रुपए व न्यूनतम 30 हजार रुपए का मासिक मानदेय देने का प्रावधान सरकार ने किया है। लेकिन प्रदेशभर के पॉलिटेक्निक व इंजीनियरिंग कॉलेजों में अभी 400 रुपए प्रति पीरियड के हिसाब से सेवाएं ली जा रही हैं। वहीं शैक्षणिक कार्य नहीं होने के कारण 15 जुलाई से इनके पास कोई कार्य नहीं है। यानी यह बेरोजगार हैं। इनके द्वारा लगातार मांग की जा रही है लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। इसके बाद अब यह अलग तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
इसका विरोध दर्ज कराने यह लाल स्याही से पोस्टकार्ड में अपनी मांग जिम्मेदारों को भेज रहे हैं। फिक्स मानदेय और 12 महीने का कार्य मांगा जा रहा है। प्रांतीय तकनीकी अतिथि एवं संविदा प्राध्यापक महासंघ के उपाध्यक्ष डॉ. आशीष खरे का कहना है कि एआईसीटीई की योग्यता हासिल करने के बाद भी उन्हें हर साल करीब 7 महीने ही काम मिलता है। इसमें भी एक पीरियड का 400 रुपए मानदेय दिया जाता है। एक महीने में मुश्किल से 10 हजार रुपए उन्हें मिलते हैं। इसलिए हम पोस्टकार्ड लिखकर शासन का ध्यान आकर्षित करना चाह रहे हैं।
वर्जन...
तकनीकी शैक्षणिक संस्थाओं पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में अतिथि विद्वानों को मजदूर से भी कम मानदेय मिल रहा है। इसलिए यह मांग रखी गई है कि शासन तकनीकी शिक्षा के अतिथि विद्वानों के हितों में जल्द निर्णय ले।
- देवांश जैन, प्रदेशाध्यक्ष, अतिथि एवं संविदा प्राध्यापक संघ