
Police health Protection: (Photo Source: Home Department, MP X हैंडल)
Police health Protection: पुलिस मुख्यालय द्वारा पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा देने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। गंभीर बीमारी और ड्यूटी में घायल होने वाले पुलिसकर्मियों को अब 14 लाख तक का सुरक्षा कवच देने का निर्णय किया गया। यह फैसला डीजीपी कैलाश मकवाना की अध्यक्षता में आयोजित मध्यप्रदेश पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएचपीएस) न्यासी मंडल की बैठक में लिया गया।
बैठक में डीजीपी ने कहा कि पुलिसकर्मी दिन-रात नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटे रहते हैं, इसलिए उनके स्वास्थ्य और परिवार की सुरक्षा पुलिस संगठन की पहली प्राथमिकताओं में शामिल है। इस दौरन डीजीपी ने लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति और उपचार संबंधी बिलों के तुरंत निवारण के निर्देश भी दिए।
बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया कि कानून-व्यवस्था ड्यूटी, अपराध विवेचना के दौरान हिंसा की दुर्घटना में घायल पुलिसकर्मियों सहित कैंसर, किडनी एवं लिवर ट्रांसप्लांट तथा ओपन हार्ट सर्जरी जैसे गंभीर मामलों में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बाद शेष राशि का भुगतान पीएचपीएस निधि से किया जाएगा।
वर्तमान में 50 प्रतिशत मिलने वाली अंतर राशि को बढ़ाकर शत-प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा गया है। जिसकी अधिकतम सीमा 14 लाख रुपये निर्धारित की गई है। कोमा और पैरालिसिस जैसी गंभीर स्थितियों में भी सहायता प्रदान की जाएगी। बता दें अभी प्रदेश के भीतर 55 और प्रदेश के बाहर 4 निजी अस्पतालों सहित कुल 59 अस्पताल योजना से जुड़े हैं। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर और अस्पतालों से अनुबंध के प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
वर्तमान 50 प्रतिशत अंतर राशि को बढ़ाकर शत-प्रतिशत करने का प्रस्ताव है, जिसकी अधिकतम सीमा 14 लाख रुपये निर्धारित की गई है। योजना के अंतर्गत आश्रित सदस्यों की पात्रता, कैशलेस उपचार की सुविधा, गंभीर बीमारियों के उपचार, आकस्मिक परिस्थितियों में चिकित्सा सहायता तथा उपचार प्रक्रिया को सरल बनाने जैसे विषयों पर चर्चा की गई। साथ ही अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त पुलिस कर्मचारियों पर आश्रित छोटे भाई-बहनों एवं दिव्यांगजनों को भी योजना का लाभ प्रदान करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया।
वहीं जानकारी के लिए बता दें कि मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने पुलिस विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। डीजीपी ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों और भोपाल-इंदौर के पुलिस आयुक्तों को निर्देश दिए हैं कि एक ही थाने में चार वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके पुलिसकर्मियों का स्थानांतरण किया जाए। जारी आदेश के अनुसार, किसी भी पुलिसकर्मी को एक ही थाने में पांच वर्ष पूरे होने से पहले अनिवार्य रूप से हटाया जाएगा। यह आदेश आरक्षक से लेकर उप निरीक्षक (एसआई) स्तर तक के अधिकारियों और कर्मचारियों पर लागू होगा।
Published on:
29 May 2026 06:03 pm
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