
Tripti Singh : एक 12वीं फेल युवती एमपी की फर्जी आइएएस बन गई। आरोपी तृप्ति सिंह फर्जी आदेश से खुद को एसडीएम बताती रही। फर्जी आइएएस के मामले में भोपाल की बागसेवनिया पुलिस को जांच के दौरान अहम दस्तावेज हाथ लगा है। आरोपी तृप्ति सिंह लोगों पर रौब जमाने के लिए खुद को गोविंदपुरा एसडीएम बताती थीं। उसके पास से इससे संबंधित लेटर जब्त किया है। जांच में यह भी सामने आया कि उसने सिविल सर्विस परीक्षा के परिणाम में छेड़छाड़ कर दूसरे अभ्यर्थी के नाम की जगह अपना नाम दर्ज कर दिया था।
फर्जी आइएएस तृप्ति सिंह ने यूपीएससी की लिस्ट को एडिट कर अपना नाम शामिल कर लिया
जांच अधिकारियों ने बताया कि फर्जी आइएएस तृप्ति सिंह ने यूपीएससी की लिस्ट को एडिट कर अपना नाम शामिल कर लिया था। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है। तृप्ति के पास गोविंदपुरा एसडीएम की तैनाती का फर्जी आदेश मिला। पुलिस अधिकारियों के अनुसार उसके कुछ अन्य केस होने की भी सूचना प्राप्त हुई है। इन जानकारियों की पुख्ता पड़ताल की जा रही है।
फाइनल सूची में बदला था नाम:
साल 2025 की फाइनल कैंडिडेट सूची में नमन गोयल की जगह नाम की जगह तृप्ति ने अपना नाम एडिट कर दिया था। इसके अलावा 13 अप्रेल 2026 को उसने गोविंदपुरा एसडीएम के पद पर नियुक्त होने का दावा किया था। इसी से जुड़े दस्तावेज पुलिस के हाथ लगे हैं।
तृप्ति सिंह की पढ़ाई को लेकर भी कई नई जानकारी सामने आई है। दसवीं के बाद वह 12 वीं की परीक्षा में फेल हो गई थी। बाद में दोबारा परीक्षा पास कर निजी कॉलेज से डिग्री हासिल की। पुलिस को उसकी एक प्रोफेशनल डिग्री भी फर्जी तरीके से तैयार कराने की जानकारी मिली है।
इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर निजी कोचिंग संस्थानों में पहुंचकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों को तृप्ति सिंह गाइड करती थीं। वह खुद को अधिकारी बताकर परीक्षा की तैयारी के टिप्स देती थी। इसके बदले कोचिंग संचालकों से रुपए लेने की बात भी जांच में सामने आई है।
इस बीच आरोपी प्रखर सिंह और ड्राइवर भूपेंद्र की चार दिन की पुलिस रिमांड पूरी हो गई। पूछताछ के बाद पुलिस ने शुक्रवार को दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया।