
Festival Clothes Return: त्योहारों की चमक-दमक के बीच सजने-संवरने का शौक किसे नहीं होता, लेकिन जब यही शौक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए सिरदर्द बन जाए तो चर्चा छिड़ना लाजमी है। भोपाल में नवरात्र और गरबा महोत्सव के दौरान खासकर कॉलेज स्टूडेंट्स ने ऑनलाइन शॉपिंग की 'फ्री रिटर्न पॉलिसी' का जमकर इस्तेमाल किया, जिसने ऑनलाइन मार्केट प्लेस में भूचाल ला दिया है। महंगे आउट फिट्स, लहंगे और चनिया चोली मंगवाकर डांडिया नाइट्स में तस्वीरें खिंचवाई गई और त्योहार खत्म होते ही उन्हें चुपचाप वापस कर दिया गया।
पहनो और लौटाओ कल्चर ने छोटे और मध्यम विक्रेताओं की कमर तोड़ दी है। ऑनलाइन ऑर्डर वापस आने पर सेलर्स को रिवर्स शिपिंग का खर्च, कपड़ों की क्वालिटी री-चेकिंग और री-पैकेजिंग का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है। ई-कॉमर्स के जानकारों का कहना है कि हर रिटर्न गलत नहीं होता, क्योंकि साइज या फैब्रिक की समस्या होना स्वाभाविक है।
रिवर्स शिपिंग का खर्चः सामान वापस आने पर सेलर को लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन का दोहरा खर्च वहन करना पड़ता है।
पॉलिसी का दुरुपयोगः नो क्वेश्चन आस्क्ड' या सात दिन की आसान रिटर्न पॉलिसी का कुछ ग्राहक चालाकी से शॉर्ट-टर्म रेंटल के रूप में उपयोग कर रहे हैं।
री-सेल वैल्यू का नुकसानः इस्तेमाल किए गए, गंदे या परफ्यूम डिओडरिस्ट लगे कपड़ों को कंपनी डैमेज्ड' मानकर नष्ट करने या भारी छूट पर बेचने को मजबूर होती है।
कंपनियों की सख्तीः इस ट्रेंड के चलते आने वाले समय में ई-कॉमर्स कंपनियां फैशन कैटेगरी पर रिटर्न पॉलिसी और अधिक सख्त कर सकती हैं। (Online Shopping Return Policy)
शहर के एमपी नगर, करोंद और हलालपुरा स्थित डिलीवरी हब इन दिनों रिटर्न पार्सल्स से पटे पड़े हैं। डिलीवरी एजेंट अभिनव सिंह के मुताबिक, नवरात्रि शुरू होते ही पारंपरिक आउट फिट्स की डिलीवरी में 60 फीसदी का भारी उछाल आया था, लेकिन त्योहार के तुरंत बाद इनमें से अधिकांश कपड़े तरह-तरह के बहाने बनाकर लौटा दिए गए। कई ग्राहकों ने कपड़ों की जगह रोजमर्रा के अन्य सामान तक ऑर्डर कर दिए। एजेंट अरबाज खान ने बताया कि सामान्य दिनों में जहां रोजाना मुश्किल दो-तीन रिटर्न पैकेट आते थे, वहीं इस सीजन में यह संख्या बढ़कर 10 से 12 तक पहुंच गई है। डिलीवरी बॉय राहुल शर्मा का कहना है कि इस्तेमाल किए गए कपड़ों को वापस भेजने से सेलर्स को दोहरा नुकसान झेलना पड़ रहा है।