
भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (cm shivraj singh chauhan) की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश में एक लाख से अधिक सरकारी पदों (government jobs in madhya pradesh 2022) को भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने अगले सप्ताह तक इस संबंध में सभी विभागों से रिक्त पदों की जानकारी देने को कहा है। इधर, प्रदेश के अस्थाई, संविदा और दैनिक वेतन भोगियों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि पहले हमें नियमित करो उसके बाद ही नए पदों पर भर्ती की जाना चाहिए।
मध्यप्रदेश में हजारों अस्थाई, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं जो कई वर्षों से सरकारी दफ्तरों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हर बार नए लोगों को भर्ती कर लिया जाता है, लेकिन यह लोग अब तक स्थाई नहीं हो पा रहे हैं। इस बार प्रदेश के सभी अस्थाई, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी एकजुट होने लगे हैं। उनका कहना है कि सरकार भर्ती की जो प्रक्रिया शुरू कर रही है उसमें कितने अस्थाई कर्मचारियों को नियमित किया जाएगा, यह भी बताना चाहिए।
सामान्य प्रशासन विभाग ने 18 अगस्त 2022 को जारी आदेश में 54 विभागों से रिक्त पदों को लेकर 23, 24 और 25 अगस्त को जानकारी मांगी है। विभागों द्वारा इन 3 दिनों में रिक्त पदों की जानकारी सामान्य प्रशासन विभाग को दी जाएगी।
पहले हमें नियमित करो
सरकार की ओर से एक लाख से अधिक रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की पहल का स्वागत करते हुए मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि हर विभाग में जो कर्मचारी संविदा, अस्थाई कर्मी और दैनिक वेतन भोगी के रूप में वर्षों से कार्य कर रहे हैं, उन्हें रिक्त पदों पर प्राथमिकता से नियमित किया जाना चाहिए। इसके बाद ही शेष पदों पर नई भर्ती की जाना चाहिए।
तिवारी का कहना है कि क्योंकि विभागों में जो कर्मचारी पहले से संविदा या अस्थाई कर्मी के रूप में काम कर रहे हैं, उनको नियमित करने से उनके अनुभव का लाभ विभागों को मिलेगा और सरकार पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं आएगा।
मुख्यमंत्री ने की थी यह घोषणा
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले माह ही घोषणा की थी कि 15 अगस्त से प्रदेश में एक लाख से अधिक सरकारी पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह पद एक वर्ष में भरे जाएंगे। इसके अलावा हर माह दो लाख लोगों को रोजगार के अवसर भी देने की बात कही गई थी। चौहान ने यह घोषणा चंद्रशेखर आजाद की जयंती के मौके पर की थी।
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