भोपाल

Cyber Crime: खाते से ऐसे उड़ाए दो लाख रुपए,फिर हुआ ये…

पासबुक में एंट्री करवाने के दौरान गायब हुई रकम का पता चला, जांच में सामने आई अनोखी बात।

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Dec 19, 2017

भोपाल। लगातार बढ़ रहे साइबर क्राइम को रोकने के लिए नए नए तरीके इजाद किए जा रहे हैं। लेकिन साइबर क्राइम के तरीके बदले जाने से इन पर पूर्णत: रोक संभव नहीं हो पा रही है। ऐसे ही एक अनोखे मामले में साइबर क्राइम पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है।
इस पूरे मामले में आरोपी ने अपने ही नाना के खाते (SBI) से दो लाख का ट्रांजेक्शन कर उसको पेटीएम में डालने के बाद निकाल लिए हैं। इसके बाद जब नाना को इस बात का पता चला तो उन्होंने इसकी शिकायत साइबर क्राइम पुलिस से की, जिस पर पुलिस ने जांच के बाद नाती को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार बागमुगालिया में रहने वाले गोटूलाल दामडे ने साइबर सेल में शिकायत की थी कि अपनी पासबुक में एंट्री करवाने के दौरान उन्हें पता चला कि उनके खाते से दो लाख रुपए निकल लिए गए हैं। साइबर सेल ने जांच में पाया कि पेटीएम के माध्यम से उनके नाती आयुष चौधरी (20) ने यह रकम निकली है। जिसके बाद पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

इधर, मृतक के खाते से 2 साल तक निकालता रहा रूपए:
इससे पहले राज्य शासन के एक कर्मचारी की मौत होने के बाद करीब दो साल तक इटारसी में उसके नाम के 42 बेययर चेक लगाकर पेंशन खाते से साढ़े चार लाख रुपये की पेंशन उड़ाने का मामला सामने आया था। मामला इलाहाबाद बैंक की स्थानीय शाखा इटारसी का है, आंतरिक जांच के बाद बैंक प्रबंधन ने इस मामले में एफआईआर के आदेश दिए।

वहीं इस मामले में भी मृतक कर्मचारी के नाती से जब बैंक प्रबंधन ने पूछताछ की तो इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

यह है पूरा मामला
इलाहाबाद बैंक में भुजबल सिंह ठाकुर के नाम से पेंशन खाता क्रं. 20610236036 संचालित है। 27 फरवरी 2012 को ठाकुर की मौत हो गई, इसके बावजूद उनके खाते में कोषालय से पेंशन आती रही।

बैंक में ठाकुर की मौत की कोई खबर नहीं थी, बैंक रिकॉर्ड में वे जिंदा रहे और उनके नाम से जारी चेक से करीब 42 बार में 4 लाख 35 हजार रुपये की राशि आहरण होती रही।

बैंक से ऐसे निकला गया पैसा प्रबंधक अजय सिंह ने बताया कि 7 दिसंबर 2012 के चेक क्रं. 10431, 10440, 16 जुलाई 2013 के चेक क्रं. 773881 से लेकर 900 एवं 7 मई 2014 के चेक क्रं. 779001 से लेकर 779020 तक सीरियल चेक लगाकर अज्ञात व्यक्ति द्वारा पेंशन राशि का भुगतान लिया गया।

बैंक नियम के अनुसार बेययर चेक (धारक) होने पर संबधित को सीधे पेमेंट होता है।

पेंशनर को जीवित होने का प्रमाण बैंक को देना पड़ता है,झूठ पेंशनर्स को नियमानुसार हर साल अपना जीवित प्रमाण बैंक को देना पड़ता है, प्रबंधन ने 2 मार्च 2016 को जब ठाकुर के नाती नीतेश सिंह से बात की तो अफसरों के होश उड़ गए। जब नीतेश ने बताया कि उनके दादा की मौत तो चार साल पहले हो चुकी है।

मृत्यु प्रमाण पत्र देने के बाद बैंक को पता चला कि पेंशनर्स के चैक से धोखाधड़ी कर पेंशन निकाली जा रही थी। विभागीय जांच के बाद अब प्रबंधन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है। इस मामले में बैंक अफसरों के अलावा और भी कई सवाल उठ रहे हैं। बैंक में ऐसे और कई मामले हो सकते हैं जिन पर अभी तक गौर नहीं किया गया।

यह उठ रहे सवाल
मृत्यु के बाद परिजनों ने 3 साल तक पेंशन की जानकारी क्यों नहीं ली। मृतक के हस्ताक्षरयुक्त बेयरर चेक कैसे इश्यू हुए। धोखाधड़ी किन लोगों ने की और उनके हाथ चेक बुक कैसे लगी। बैंक ने तीन साल तक जीवित प्रमाण पत्र क्यों नहीं लिया, कहीं बैंक के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत तो नहीं है।

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Published on:
19 Dec 2017 02:29 pm
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