प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पक्का मकान बनाना सरकारी तौर पर और भी महंगा पड़ने वाला है।
मध्य प्रदेश में चुनावी साल के बीच महंगाई से त्रस्त ग्रामीण जनता को एक बड़ा झटका और लगने वाला है। एक तरफ तो मकान बनाने का सपना देखने वाले लोगों को महंगा मटेरियल खरीदने का भार तो उठाना ही पड़ रहा है। इसी के साथ अब प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पक्का मकान बनाना सरकारी तौर पर और भी महंगा पड़ने वाला है। दरअसल, अब मकान बनाने के लिए ग्रामीणों को निर्धारित शुल्क भी सरकार को अदा करना पड़ेगा।
जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में पक्का घर बनाने की चाहत रखने वालों को अब सरकार को शुल्क भी अदा करना होगा। शहरों की तर्ज पर गांवों में भी मकान बनाना अब आसान नहीं होगा। अब मकान बनाने के लिए ग्राम पंचायतों से परमिशन प्राप्त करनी होगी। परमिशन के साथ दो हजार से पच्चीस हजार रुपए तक शुल्क सरकार को चुकाना होगा। पुराने मकान के स्थान पर नए मकान का निर्माण करने के लिए भी परमिशन लेना होगी। बताया जा रहा है कि, गांव में मकान निर्माण करने के लिए पंचायत से ही भवन अनुज्ञा लेना जरुरी होगा।
सिर्फ पक्के निर्माण पर चुकाना होगा शुल्क
अनुज्ञा जारी करने का अधिकार ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के सहायक यंत्री स्तर के अधिकारी को होगा। हालांकि, जमीन पर मिट्टी, गारे या स्थानीय सामग्री से बनने वाले मकानों के लिए भवन निर्माण की अनुज्ञा लेने की जरूरत नहीं होगी। कमर्शियल यूज के लिए बनने वाले भवन, दुकान, गोदाम, कारखाना, व्यापार, कारोबार के लिए फीस अदा करनी होगी। 2500 वर्गमीटर से अधिक निर्मित वाले इलाके पर भवन निर्माण के लिए व्यक्ति को 15 हजार रुपए तक शुल्क चुकाना होगा।