भोपाल

हिनोतिया आलम में बिल्डरों ने बेच दी 17.5 एकड़ निष्कांत भूमि, ईओडब्ल्यू ने दर्ज की FIR

भारत-पाकिस्तान बंटवारे के समय करीब 175.37 एकड़ जमीन पर कोई नहीं था हकदार

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Nov 25, 2019
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भोपाल/ हिनोतिया आलम और ग्राम चूनाभट्टी में सरकारी जमीन की खरीदी-बिक्री को लेकर आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने एफआइआर दर्ज की है। एफआईआर में हिनोतिया आलम की 17.5 एकड़ वह जमीन भी आरोपियों ने बेच दी जो निष्कांत (अनक्लेम्ड) भूमि थी। भारत पाकिस्तान बंटवारे के दौरान इस जमीन का कोई भी हकदार नहीं था, इसलिए अलग-अलग गृह निर्माण सहकारी समितियां बनाई और कूटरचित कागज तैयार कर जमीन बेच दी गई। इस जमीन की अरबों रुपए कीमत है।

वहीं, चूनाभट्टी में भी इसी तरह कम जमीन का डायवर्शन और अनुमतियां लेकर सरकारी जमीन भी बेच दी। दोनों ही जगह की बेशकीमती जमीन की खरीद-फरोख्त से जहां शासन को करोड़ों रुपए का स्टांप ड्यूटी चुराकर नुकसान पहुंचाया गया है, वहीं सरकारी जमीन पर मकान तान दिए गए हैं। ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों ही जगह की जमीन का सौदा करने में न्यू कृषि नगर गृह निमाण सहकारी संस्था और इसके अध्यक्ष श्यामनाथ शर्मा की अहम भूमिका है।

चुनाभट्टी की 103/11,111/11/4/1 का अंश भाग अलग-अलग लोगों को बेची गई है। जांच में पता चला है कि चूनाभट्टी में बिल्डरों ने मिलकर सरकारी जमीन का सौदा किया है। इन्होंने नगर तथा ग्राम निवेश से जितनी जमीन पर अनुमतियां ली, उससे अधिक जमीन पर निर्माण कर बेच दी। ईओडब्ल्यू ने केस दर्ज कर सभी को आरोपी बना लिया है। इससे करोड़ों रुपए के स्टांप की चोरी भी की गई।

इन्हें बनाया आरोपी

श्यामनाथ शर्मा, आत्मज एसएन शर्मा, अरेरा कॉलोनी निवासी पर सरकारी जमीन खुर्दबुर्द करने का आरोप है। रामनाथ शर्मा, पुत्र एसएन शर्मा, एसएन शर्मा पुत्र जानकीनाथ शर्मा, श्यामनाथ पुत्र एसएन शर्मा और कुसुम शर्मा पत्नी अश्विनी शर्मा अरेरा कॉलोनी निवासी। इन्होंने अलग-अलग लोगों से अनुबंध करके जमीन पर निर्माण कर बेचा। ईओडब्ल्यू को यह भी पता चला है कि मुख्तयारआम राकेश मलिक जगप्रवेश मलिक के नाम पर पॉवर ऑफ अटॉर्नी बताकर खसरा नंबर 9/4 और 9/5 की जमीन कई लोगों को बेच दी।

बेची गई जमीन की रजिस्ट्री में यह नहीं बताया गया है कि यह जमीन कब और किससे इन्होंने खरीदी है। ईओडब्ल्यू को आशंका है कि यह जमीन सरकारी है और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर इसका सौदा किया गया है। सौदे से करोड़ों की जमीन खुर्दबुर्द कर दी गई वहीं, स्टांप ड्यूटी जमा नहीं कर शासन को भी हानि पहुंचाई गई है। बेची गई जमीन के दस्तावेजों में रकबा का उल्लेख ही नहीं किया है। यह तरीका स्टांप चोरी के लिए अपनाया गया।

कुटररचित दस्तावेज बनाए

ईओडब्ल्यू की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने जमीन के सौदे के लिए कुटरचित दस्तावेज तैयार किए है। किसानों के नाम पर जमीन दर्शाने वाले कागज भी तैयार किए। आरोपियों ने अलग-अलग गृह निर्माण सहकारी समितियां बनाकर वारदात की। इन्होंने कम जमीन पर निर्माण संबंधी अनुमतियां-डायवर्शन लेकर इसकी आड़ में मौके पर मौजूद सरकारी जमीन भी बेच दी। हिनोतिया आलम में तो निष्कांत भूमि तक बेच दी गई।

Published on:
25 Nov 2019 11:21 am