
Rajya Sabha Election Controversy- मध्यप्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में तीनों सीट पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया। तीनों सदस्यों को गुरुवार दोपहर में निर्विरोध निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र भी सौंप दिया गया है। इसे लेकर भोपाल से दिल्ली तक राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस हैरान है कि भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतारकर उनकी एक सीट छीन ली। कांग्रेस इसे गलत बताते हुए शुक्रवार को राष्ट्रपति से मुलाकात करने वाली है। इस दौरान मध्यप्रदेश के सभी कांग्रेस विधायक दिल्ली पहुंच रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी दिल्ली में शुक्रवार को बड़े प्रदर्शन की तैयारी में हैं। इस सिलसिले में मध्यप्रदेश के सभी कांग्रेस विधायक दिल्ली पहुंच रहे हैं। सभी कांग्रेस विधायक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मध्यप्रदेश के घटनाक्रम की शिकायत करेंगे।
इस बारे में मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीडिया को बताया कि "संघर्ष के अगले चरण के लिए सभी विधायक कल दिल्ली आ रहे हैं। हमने राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है और समय मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं। कल हम अपनी बात रखने के लिए पूरी मीडिया को बुलाएंगे और फिर आगे के कदम उठाएंगे। बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी की सोच क्या है? अगर पेट्रोल महंगा होता है, तो वे किसी और को दोष देते हैं; अगर महंगाई बहुत ज़्यादा होती है, तो वे किसी और को दोष देते हैं; अगर NEET का पेपर लीक होता है, तो वे किसी और को दोष देते हैं; अगर किसान परेशान हैं और उन्हें यूरिया या खाद नहीं मिल पा रही है, तो वे किसी और को दोष देते हैं। देश में अराजकता का माहौल है, चाहे वह विदेश नीति हो, अर्थव्यवस्था हो या किसानों की बदहाली। अगर इन सबके लिए कोई एक निशाना है, तो वह मोदी हैं…"
पटवारी ने कहा कि "नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हमारे सभी विधायकों के हस्ताक्षर के साथ राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगा है। मुद्दा यह है कि देश के सबसे बड़े सदन, राज्यसभा में मीनाक्षी का नॉमिनेशन एक ऐसी बात पर रद्द कर दिया गया, जिसे आम हालात में पंचायत या ज़िला स्तर पर एक छोटी-सी प्रक्रियात्मक कमी माना जाता। उन्होंने कहा कि समन का जिक्र नहीं किया गया था। हालांकि, राज्यसभा नॉमिनेशन फ़ॉर्म में समन की जानकारी देने का कोई प्रावधान नहीं है। तो फिर इसका ज़िक्र कहाँ किया जाना था? वे इस कारण को समझा नहीं पाए हैं। आखिरकार, हमने भारत के चुनाव आयोग के सामने न्याय की अपील की। उसके बाद, हम सुप्रीम कोर्ट गए। अगर हमें इन दोनों संस्थाओं से न्याय नहीं मिलता है, तो अंतिम संवैधानिक अथॉरिटी राष्ट्रपति हैं।"