बिना जूते मोजे उतर गईं फुटबॉल के मैदान में, धार की रहने वाली ज्योति चौहान ने असुविधाओं के बावजूद फुटबॉल खेल में अपनी अलग पहचान बनाई
मुकेश विश्वकर्मा, भोपाल. बचपन में पिता का साया छूट गया था। उनके पास न जूते थे न मोजे । यहां तक कि कोच ने ही अपने खर्चें से उन्हें फुटबॉल किट दी थी लेकिन जज्बा आसमान छूने का ही था और उन्होंने ऐसा करके भी दिखा दिया। मप्र के धार की रहने वाली ज्योति चौहान ने असुविधाओं के बावजूद फुटबॉल खेल में अपनी अलग पहचान बनाई है। हाल ही उन्होंने इंडियन वुमन लीग में हिस्सा लिया और देश की एकमात्र अनकैप्ड महिला फुटबॉलर भी बन गई हैं। इतना ही नहीं वे विदेशों में भी अपना हुनर बखूबी दिखा रही हैं।
23 वर्षीय ज्योति दस साल की उम्र से फुटबॉल खेल रही हैं। उन्होंने बिना कोई सुविधा के ही फुटबॉल खेलना शुरू किया, बिना थके, बिना रूके रोज पांच-पांच घंटे तक अभ्यास किया। अब उनका मकसद देश के लिए खेलना है। ज्योति ने बताया कि वह भारतीय टीम में जगह बनाना चाहती हैं। इसके लिए कोई भी मौका गंवाना नहीं चाहती हैं। वे दो बार इंडिया कैंप में गई लेकिन इंडियन टीम में जगह नहीं मिली।
वह मानती हैं कि हर मुश्किल डगर पर संभलकर चलना चाहिए। पूरा फोकस लक्ष्य पर होना चाहिए तभी सफलता मिलती है। उन्होंने इस दौरान 12 नेशनल खेले हैं। दो बार मुंबई के क्लब कैकरे और फ्रूटी फ्रूट से खेलीं। जार्डन में हुई एएफसी चैंपियनशिप में भाग लिया।
क्रोएशिया इंटरनेशनल फुटबॉल लीग खेली
पिछले साल इंडियन वुमन लीग का खिताब जीता। फिर क्रोएशिया इंटरनेशनल फुटबॉल लीग खेली। वह देश की एकमात्र अनकैप्ड खिलाड़ी हैं जो विदेशी लीग खेलेंगी।