भोपाल

14 महीने बाद मध्यप्रदेश में ‘सब्र’ का ‘समय’ खत्म

कांग्रेस में लगातार हो रही थी ज्योतिरादित्य सिंधिया की अनदेखी

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Mar 10, 2020

भोपाल/ कर्नाटक की तरह मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस सरकार की लाइफ चौदह महीने की ही थी। सरकार जब से बनी थी, उसके बाद से ही खींचतान जारी थी। मध्यप्रदेश में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद सिंधिया ही सीएम बनना चाहते थे। उनके समर्थकों की मांग भी यहीं थी, महाराज की ताजपोशी हो। आलाकमान ने कमलनाथ को सीएम बनाने का फैसला किया था।

कमलनाथ के नाम के ऐलान के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक तस्वीर ट्वीट की थी। इस तस्वीर में राहुल गांधी के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ थे। कमलनाथ के चेहरे पर उस समय खुशी देखने लायक थी लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया का बॉडी लैंग्वेज बता रहा था कि थोड़े दिन सब्र रखो। देखने से यह प्रतीत हो रहा था कि इस फैसले से ज्योतिरादित्य सिंधिया खुश नहीं हैं।

भोपाल में हुआ था हंगामा
फैसले के बाद दिल्ली से जब ज्योतिरादित्य सिंधिया भोपाल लौटे थे, तब कांग्रेस मुख्यालय में उनके समर्थकों ने खूब हंगामा किया था। उनकी मांग थी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम बनाया जाए। बाद में लोग शांत हुए थे। उसके बाद प्रदेश की राजनीति से सिंधिया दूर हो गए थे। लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश के एक हिस्से की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। लोकसभा चुनाव के दौरान वह मध्यप्रदेश में अपने क्षेत्र को छोड़ कहीं और एक्टिव नहीं दिखे। हालांकि गुना सीट से उनकी हार हो गई।

लगातार हो रही थी अनदेखी
लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया की करारी हार के बाद पार्टी में लगातार उनकी अनदेखी हो रही थी। इससे ज्योतिरादित्य सिंधिया बेहद ही खफा थे। उनकी बातों को आलाकमान लगातार इग्नोर कर रही थी। सिंधिया चाहते थे उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाए। साथ ही उन्हें राज्यसभा भेजा जाए। लेकिन पार्टी इसके लिए तैयार नहीं थी। सिंधिया लगातार मध्यप्रदेश की सियासत में इसके लिए संघर्ष कर रह थे।


सब्र रखा
सिंधिया अपनी बात को रखने और मनवाने के लिए बड़े नेताओं के संपर्क में थे। मगर अनसुनी की जा रही थी। बार-बार पार्टी के द्वारा आश्वासन दिया था, बीतते वक्त के साथ वह सब्र भी रखे हुए थे। लेकिन उन्हें सोनिया गांधी मिलने के लिए वक्त तक नहीं दे रही थी। इससे सिंधिया बेहद ही खफा थे, उसके बाद ही उन्होंने अपने करियर को देखते हुए चौदह महीने बाद यह फैसला लिया है।


सिंधिया ने ही दिलाई सत्ता
सिंधिया के समर्थक कहते हैं कि मध्यप्रदेश में सभी लोग जानते हैं कि प्रदेश में कांग्रेस की वापसी किसकी वजह से हुई है। उसके बाद भी उनकी उपेक्षा हो रही थी। कुछ दिन पहले सिंधिया खेमे के मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने भी कहा था कि सिंधिया की अगर इसी तरह अनदेखी हुई तो कांग्रेस की सरकार पर घने कोहरे बादल छाएंगे। जिसे हटाना मुश्किल होगा।

Published on:
10 Mar 2020 01:42 pm
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