पुरानी पेंशन बहाली की मांग तेज, लड़ाई का केंद्र दिल्ली, 28 केंद्रीय संगठनों के साथ रेल कर्मियों ने मिलाया हाथ
अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के पहले पुरानी पेंशन बहाली और ईपीएफ बढ़ोतरी के लिए राज्य व केंद्र के कर्मचारियों ने सरकारों की घेराबंदी शुरू कर दी है। राज्य के सरकारी कर्मचारियों से जुड़े संगठनों के पदाधिकारी अन्य राज्यों में नए सिरे से सक्रिय हुए हैं। पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष ने राजस्थान में चुनाव के बाद सभाएं कीं, यहां राज्य के कर्मियों को तो पुरानी पेंशन मिल रही है, लेकिन केंद्र के कर्मचारी वंचित है। केंद्रीय कर्मचारियों के संगठनों ने भी लड़ाई तेज कर दी है। पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल, कोटा व जबलपुर रेल मंडल में आने वाले 97 फीसद कर्मचारियों ने आंदोलन में शामिल होने के पक्ष में मतदान किया है।
कांग्रेस ने किया है वादा
राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल व पंजाब में ओपीएस लागू है। मप्र कांग्रेस ने सरकार बनने पर लागू करने का वादा किया है। पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन के मप्र अध्यक्ष परमानंद डेहरिया का कहना है कि राष्ट्रीय स्तर पर ओपीएस बहाली की लड़ाई जारी रहेगी।
केंद्र के सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी भी ईपीएस में बढ़ोतरी की मांग के लिए नए सिरे से दबाव बनाने लगे हैं। निवृत्त कर्मचारी 1995 राष्ट्रीय समन्वय समिति के मप्र अध्यक्ष चंद्रशेखर परसाई का कहना है कि भविष्य निधि संगठन में दर्ज कर्मचारियों को न्यूनतम 1000 से 2500 रुपए प्रति माह पेंशन मिल रही है, जो बहुत कम है। सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि ऐसे कर्मचारियों को वास्तविक वेतन की गणना कर पेंशन दी जाए। मप्र समेत 20 राज्यों के कर्मचारी 12 दिसंबर को दिल्ली में जुटेंगे।
ओपीएस से बाहर
- केंद्र व राज्य सरकारों के 80 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें मप्र के करीब 5 लाख कर्मचारी भी शामिल हैं, जो ओपीएस से बाहर हैं।
- ईपीएफ में वृद्धि: 39 लाख कर्मचारी मप्र के अलग-अलग निजी व केंद्र से जुड़े़ उपक्रमों में कार्यरत। इनमें 3.50 लाख पेंशनभोगी शामिल हैं। सभी राज्यों के कर्मी 6 करोड़ हैं। इनमें 75.69 लाख पेंशन भोगी।