भोपाल

डैम और तालाब में उफान से बचाने तैयार हुआ प्लान

प्रजेंटेशन के माध्यम से कलेक्टर ने देखी स्थिति
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Feb 08, 2020
 meeting
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भोपाल. भारी मानसून से शहर में किन-किन क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनती है? किन क्षेत्रों में डैम भरने से खतरा हो जाता है, इसे लेकर शुक्रवार को कलेक्टोरेट में आपदा प्रबंधन की बैठक हुई। बैठक में कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने पहली बार जिले का प्लान तैयार कराया। इसमें बड़ा तालाब, कोलार, केरवा, कलियासोत नदी व सीहोर से आने वाली नदी में ईंटखेड़ी और आस-पास के गांवों में क्या स्थिति बन सकती है और क्या बनती है, इस पर विस्तृ़त चर्चा हुई। महापौर आलोक शर्मा ने भी विचार रखे।
कलेक्टर ने बताया कि जिले में अभी तक आपदा प्रबंधन का प्लान तैयार नहीं था। कितना बल उपलब्ध है, अचानक आपदा आई तो कंट्रोल रूम और बचाव के लिए क्या किया जा सकता है? निचले हिस्सों में रह रहे लोगों को कैसे समय रहते निकाला जाए, अभी तक आपदा आने के बाद ही इस पर काम होता था।?उन्होंने कहा कि पहले से टीम बनाने के निर्देश बैठक में दिए हैं। इसके लिए आपदा प्रबंधन समिति का गठन होगा और एक कंट्रोल रूम भी तैयार कराया जाएगा।

सॉफ्टवेयर में होगी अपडेट
कलेक्टर ने आपदा से संबंधी जानकारी क्लस्टर लेवल पर साफ्टवेयर में अपडेट करने के लिए कहा है। एसएलआर इसकी मॉनीटरिंग करेंगे। साथ ही हर 15 दिन में ये जानकासरी अपडेट कराई जाएगी।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष मनमोहन नागर, जिला पंचायत सीईओ सतीश कुमार एस, अपर कलेक्टर आर.पी.भारती सहित आपदा प्रबंधन से संबंधित विभाग प्रमुख उपस्थित थे।

शहर में ये क्षेत्र हैं ज्यादा संवेदनशील
बैठक में बताया गया कि आमतौर पर शहर में मानसून के बाद कोलार क्षेत्र के निचले इलाके, बैरागढ़ क्षेत्र, जाटखेड़ी, गेंहूंखेड़ा, दामखेड़ा, अशोका गार्डन, ईटखेड़ी सहित कई इलाके डूब क्षेत्र में आ जाते हैं। पिछले साल ही मानसून में यहां निचली बस्तियों में पानी भरने के बाद लोगों को निकाला गया था। अब इसके लिए लगभग हर माह एक टीम लोगों के साथ मॉक ड्रिल करेगी। इस टीम का नाम क्विक रिस्पांस टीम होगा। ये टीम क्लस्टर स्तर पर आपदा संबंधी बैठकें भी करेगी। इस टीम में नगर निगम के अधिकारी भी साथ रहेंगे। एनडीआरएफ, होमगार्ड और पुलिस विभाग सामजस्य स्थापित कर रणनीति बनाएंगे।

Published on:
08 Feb 2020 03:12 am