17 सितंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

MP Community Service Guidelines: छोटे अपराध करने वाले कैदी नहीं जाएंगे जेल ! देनी पड़ेगी कम्युनिटी सर्विस

MP Community Service Guidelines-2026: मध्यप्रदेश में गृह विभाग ने ‘मप्र कम्युनिटी सर्विस गाइडलाइंस-2026’ अधिसूचित कर दी है, जिससे छोटे और पहली बार अपराध करने वालों को जेल की बजाय बिना वेतन सामुदायिक सेवा की सजा दी जा सकेगी।
2 min read
Google source verification
जेल का फोटो, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

जेल का फोटो, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Bhopal news: छोटे और पहली बार अपराध करने वाले कैदियों को अब हर मामले में जेल भेजने की बजाय उनके सामाजिक काम के जरिए सजा भुगतने का रास्ता साफ हो गया है। गृह विभाग ने 'मप्र कम्युनिटी सर्विस गाइडलाइंस-2026' अधिसूचित कर दी है। इसके तहत अदालत अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों के अनुरूप निश्चित अवधि के लिए बिना वेतन सामुदायिक सेवा का आदेश दे सकेगी। यह व्यवस्था भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 23 (2) के तहत दी जाने वाली कम्युनिटी सर्विस की सजा के लिए लागू होगी। गाइडलाइन 11 सितंबर 2026 को राजपत्र में प्रकाशन के साथ प्रभावी हो गई है।

पहली बार अपराध करने वालों पर विशेष जोर

कम्यूनिटी सर्विस को मुख्य रूप से पहली बार अपराध करने वालों के लिए उपयोगी माना है। आदतन अपराधी को यह सजा देने में कोर्ट को इसके कारण दर्ज करने होंगे। सजा तय करते समय उम्र, शारीरिक क्षमता, शिक्षा, पेशा, कौशल, सामाजिक-आर्थिक स्थिति ध्यान में रखा जा सकेगा। सार्वजनिक हित और दोषी की गरिमा व सुरक्षा को ध्यान में रखकर सजा दी जाएगी।

कैदी की कौशल के अनुरूप देंगे काम

गाइडलाइन में यह भी व्यवस्था है कि यदि किसी पेशेवर व्यक्ति जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, अकाउंटेंट या वकील को कम्युनिटी सर्विस की सजा मिलती है तो अदालत उसके पेशेवर कौशल का इस्तेमाल समाज के जरूरतमंद या वंचित वर्ग के हित में करवा सकती है। कम्युनिटी सर्विस में अनुपस्थित रहने, काम छोड़ देने, अनुशासनहीनता या अधिकारी के निर्देश नहीं मानने को डिफॉल्ट माना जाएगा। निगरानी अधिकारी इसकी रिपोर्ट अदालत को देंगे।

अदालत दोषी को चेतावनी देकर समय बढ़ा सकती है, सेवा का स्थान या प्रकृति बदल सकती है या शेष कम्युनिटी सर्विस को मूल आदेश में तय कारावास की सजा में बदला जा सकता है। इसके अलावा कम्युनिटी सर्विस में दोषी को सरकारी अस्पताल के वार्ड, ओपीडी में सफाई, कैजुअल्टी व मरीज सुविधा में सहायता, स्कूल में सफाई, लाइब्रेरी में रिकॉर्ड संधारण, निकायों में सफाई, पौधरोपण जैसे कार्य किए जा सकते है।

कितने घंटे काम करना है, आदेश में साफ होगा

कम्युनिटी सर्विस का आदेश अस्पष्ट नहीं रहेगा। अदालत को इसमें सेवा के कुल घंटे या दिन, शुरू और पूरा करने की समय-सीमा, काम का स्थान, निगरानी और अधिकृत अधिकारी का नाम, रिपोर्टिंग की व्यवस्था तथा पालन नहीं करने पर होने वाली कार्रवाई स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी। संबंधित अधिकारी रोजाना उपस्थिति और काम का रिकॉर्ड रखेंगे तथा प्रगति की रिपोर्ट निरंतर अदालत को भेजेंगे।