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MP passport racket: 70863015… नंबर में छिपी साजिश, साइबर कैफे से हुए थे 57 पासपोर्ट के आवेदन, IP से खुला राज

MP fake passport racket: मास्टरमाइंड रियाल चौधरी ने भोपाल के अन्ना नगर और डबरा के साइबर कैफे से फर्जी पतों पर 57 बांग्लादेशी घुसपैठियों के पासपोर्ट के आवेदन किए, जिनमें कई फरार हैं।
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MP fake passport racket, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

MP fake passport racket, प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source: AI Image)

Gwalior news: फर्जी पतों से मध्यप्रदेश में बांग्लादेशी घुसपैठियों के पासपोर्ट बनवाने में मास्टरमाइंड रियाल चौधरी ने गोविंदपुरा के अन्ना नगर (भोपाल) और डबरा के दो साइबर कैफे का इस्तेमाल किया था। रियाल ने घुसपैठियों के पासपोर्ट के लिए 40 आवेदन गोविंदपुरा और 17 डबरा के साबइर कैफे से ऑनलाइन आवेदन किए थे। अन्ना नगर का साइबर कैफे अशोक विहार बौद्ध मठ से 300 मीटर की दूरी पर है, जबकि डबरा में साइबर कैफे सिमरिया गांव से करीब 500 मीटर दूर है। जिस आइडी से आवेदन हुए थे एसटीएफ ने उससे आइपी एड्रेस ट्रैक कर दोनों साइबर कैफे चिह्नित किए है। अन्नानगर, भोपाल का कैफे संचालक को एसटीएफ ने हिरासत में लिया है। वह बता रहा है रियाल भंते (बौद्ध भिक्षु) के भेष में आता था वह क्या करता था यह उसे नहीं पता है।

परिपत्र में अहम कड़ी

-थाना प्रभारी परिपत्र के भौतिक सत्यापन के लिए संबंधित बीट प्रभारी को नाम सहित सौंपेंगे। यह काम प्रधान आरक्षक या उससे वरिष्ठ पुलिसकर्मी द्वारा ही किया जाएगा।

-डबरा में पासपोर्ट बनवाने में गृह विभाग के इस आदेश की अनदेखी होना बताई जा रही है यहां दस्तावेजों का सत्यापन का काम हवलदार के बजाए सिपाही को थमाया गया था।

गृहविभाग के परिपत्र से तय होंगे जिम्मेदार

फर्जी दस्तावेजों के जरिए 17 बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनाए जाने के मामले में नगर पालिका, राजस्व के साथ डबरा थाने में उस दौरान टीआइ विनायक शुक्ला और सिपाही भूपेन्द्र गुर्जर की लापरवाही मानी जा रही है। ऐसे मामलों के लिए मध्यप्रदेश के गृह विभाग द्वारा 14 जनवरी 2002 को जारी परिपत्र में साफ लिखा है परिपत्र का सत्यापन जिला मुख्यालय जिला विशेष शाखा के उप पुलिस अधीक्षक करेंगे। अगर डीसएपी नहीं है तो एसपी किसी राजपत्रित अधिकारी को यह काम सौंपेंगे।

ये हैं फरार

टीटू रॉय, शुभा मुतशुद्धी, सुमन सरकार, अमित चौधरी, सइकत चौधरी, विप्लव अधिकारी, डिगोन्तो अधिकारी, राजीव रॉय, लावुल रॉय, अरित्रा रॉय, दीपक घोष, सूरज राय, सुजीत रॉय और रॉकी चौधरी यह घुसपैठिए फरार हैं।

मास्टरमाइंड के पेट में छिपा राज

फर्जी पासपोर्ट कांड बनवाने के पीछे असली मकसद क्या है अभी तक राज नहीं खुला है। जांच एजेंसी की नजर में रियाल चौधरी ने फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाने की कहानी तो सुनाई है लेकिन इसका मकसद नहीं उगला है सही वजह रियाल चौधरी के अलावा उस वक्त बौद्ध मठों में मौजूद रहे भंते और इस साजिश में शामिल इनके मददगार ही बता सकते हैं।

प्लानिंग से खेला एक मोबाइल नंबर का खेल

एसटीएफ की नजर में रियाल चौधरी ने फर्जी पासपोर्ट की साजिश सोच समझ कर रची थी। उसने 17 पासपोर्ट में डबरा के सिमरिया गांव स्थित आंबेडकर पार्क और तथागत बुद्ध विहार का पता दर्ज कराया हैं। इनमें से 8 पासपोर्ट में उसने एक ही मोबाइल नंबर 70863015… दर्ज कराया है। दरअसल रियाल चौधरी को पता था कि फजी दस्तावेजों से पासपोर्ट का राज खुलेगा तो पुलिस सबसे पहले पासपोर्ट में दर्ज मोबाइल नंबर से तलाशेगी। सभी पासपोर्ट पर एक नंबर ही मोबाइल नंबर होगा तो उलझ जाएगी इस दौरान घुसपैठियों को भागने का मौका मिल जाएगा।

दोषियों को चिह्नित कर नोटिस

फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनवाने के लिए मास्टरमाइंड ने साइबर कैफे से ऑनलाइन आवेदन किए थे। इनमें भोपाल के अन्नानगर के साइबर कैफे संचालक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। उससे जानकारी जुटाई जा रही है। फर्जी दस्तावेजों से पासपोर्ट बनाने के मामले में शासकीय विभागों में जिन लोगों की लापरवाही सामने आई है। उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। इन्हें नोटिस भेजे जा रहे हैं पूछताछ और जांच के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई होगी। - राजेश सिंह भदौरिया एसटीएफ एसपी भोपाल