
Bhopal Master Plan: मास्टर प्लान में बड़े बदलाव की तैयारी (फोटो सोर्स- Patrika)
Bhopal Master Plan Supreme Court Hearing: मध्य प्रदेश के भोपाल में कॉलोनी में कारोबार और इसके विकल्पों को लेकर जारी बहस के बीच अब परेशान होने की बारी अफसरों और नेताओं की है। सुप्रीम कोर्ट में जारी बहस और सरकार की जोड़तोड़ के बीच इस समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। इस फार्मूले को सरकार लागू करने जा रही है। इस प्रकार आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि को लेकर उठा विवाद अब नेताओं-अफसरों की शांति भंग करने की स्थिति में आ गया है। चार इमली, 74 बंगला, राजभवन यहां तक कि सीएम हाउस तक के आसपास हाइराइज बिल्डिंग बनने की स्थितियां बन रही है।
दरअसल सड़क की चौड़ाई के आधार पर मिक्स्ड लैडयूज तय करने की बात उठ रही है। टीएंडसीपी के पास इसे लेकर 100 आवेदन पहुंच चुके हैं। मप्र भूमि विकास नियम 2012 में संशोधन के लिए जारी ड्राफ्ट में भी लोगों ने सड़क आधारित मिक्स्ड लैडयूज तय करने के लिए आवेदन दिए। सुप्रीम कोर्ट में भी इसे एक ठोस सुझाव की तरह रखा जा रहा है। मिक्स्ड लैडयूज में 18 मीटर, 24 मीटर और उससे अधिक चौड़ाई की सड़कों के किनारे आवासीय यह व्यावसायिक निर्माण व उपयोग की राह बनेगी।
चूनाभट्टी से कोलार तक सिक्सलेन शहर का नया ग्रोथ इंजन है।
रोड किनारे का एक किमी का हिस्सा पूरी तरह व्यावसायिक हो गया।
नर्मदापुरम रोड की तरफ शहर का विकास तय किया था और ये नजर भी आ रहा।
व्यावसायिक तौर पर शहर का नया सबसे विकसित क्षेत्र बन गया। अभी कई प्रोजेक्ट यहां आ रहे।
दस लेन अयोध्या बायपास अभी रहवासी क्षेत्र है, लेकिन 36 मीटर चौड़ाई होने से इसके आसपास ऊंची बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतों का रास्ता बन रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कॉलोनी में कारोबार करने वाले व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई में गंभीर अनियमितता सामने आई है। नगर निगम द्वारा भवन अनुज्ञा शाखा के अधिकारियों को जारी शक्ति आदेश के उल्लंघन के प्रकरण में लापरवाही बरतने वाले इंजीनियरों के खिलाफ ईओडब्ल्यू में शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता एडवोकेट सिद्धार्थ गुप्ता ने शक्ति आदेश की आड़ में दशमलव 75 फ्लोर एरिया रेशो वाले समस्त रहवासी क्षेत्र में बहुमंजिला इमारत बनने देने और निगरानी नहीं करने के लिखित लगाए हैं। नगर निगम आयुक्त द्वारा जारी बिल्डिंग परमिशन शक्ति आदेश के पालन के लिए सिटी प्लानर्स को अलग-अलग क्षेत्र की निगरानी की जवाबदेही दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के बाद नगर निगम ने इन क्षेत्रों में सीलिंग की कार्रवाई शुरू की थी। इस कार्रवाई को अरेरा कॉलोनी, गुलमोहर, कोलार, मणिपुरम कॉलोनी में नियमों के अनुसार संचालित नहीं किया गया।
भवन अनुज्ञा शाखा के इंजीनियर एसर्क राजेश, अनिल कुमार टटवाड़े, श्रीकांत सराठे ने आवंटित इलाकों में संपत्तियों का भौतिक सत्यापन नहीं किया जिसके चलते रसूखदार लोगों के निर्माण कार्रवाई में शामिल ही नहीं हो सके। इसका फायदा उठाते हुए बड़े पैमाने पर लोगों ने कोर्ट से स्टे ऑर्डर भी ले लिए। इस मामले में नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने पूर्व में कविता सोनी, देवेश गढ़वाल एवं राकेश लहरिया को निलंबित किया था। गड़बड़ी के चलते अरेरा कॉलोनी सहित आसपास के रहवासी क्षेत्र में फ्लोर एरिया रेशो का अनुपात नहीं होने के बावजूद बहुमंजिला इमारतें रहवासी प्लॉट पर तैयार की जा रही है। ईओडब्ल्यू में लिखित शिकायत कर इंजीनियरों की इस लापरवाही की जांच की गई है।
Updated on:
17 Sept 2026 07:12 am
Published on:
17 Sept 2026 07:12 am
