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सड़क खुद बताएगी अपना हाल, एमपी की 70 हजार कि.मी सड़कों का बनेगा डिजिटल हेल्थ कार्ड

Road Digital Health Card : लोक निर्माण विभाग ने सड़कों और विकास कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए 'लोक कल्याण सूचकांक' आधारित ऑनलाइन सिस्टम तैयार किया है। इसके चलते अब रिपोर्ट नहीं, सड़क खुद बताएगी अपना हाल।
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Road Digital Health Card

भोपाल से रियल टाइम निगरानी की जाएगी (फोटो सोर्स: Chatgpt)

Bhopal News : सड़क ठीक है या खराब, निर्माण समय पर हुआ या नहीं, बजट का कितना उपयोग हुआ और सड़क बनने के कुछ समय बाद ही गड्ढे पड़ गए या नहीं… अब इन सवालों का जवाब केवल अफसरों की निरीक्षण रिपोर्ट से नहीं मिलेगा। सड़क की स्थिति का डेटा खुद सामने आएगा। लोक निर्माण विभाग ने मध्य प्रदेश की सड़कों और विकास कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए 'लोक कल्याण सूचकांक' आधारित ऑनलाइन सिस्टम तैयार किया है। इसमें अलग-अलग मानकों के आधार पर हर काम का मूल्यांकन किया जाएगा। सकी निगरानी राजधानी भोपाल से की जाएगी।

इस सिस्टम की खासियत ये है कि, निगरानी सिर्फ पीडब्ल्यूडी की सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी। एमपीआरडीसी समेत सड़क बनाने वाली अन्य एजेंसियों की सड़कें, पुल और पुलिया भी इसके दायरे में आएंगे। यानी इससे पता चलेग कि सड़क किस विभाग ने बनाई है, इससे ज्यादा महत्वपूर्ण ये होगा कि, उसकी वास्तविक स्थिति क्या है? ये भी पता रखा जा सकेगा।

रिपोर्ट में छिप नहीं सकेंगे गड्ढे

अब किसी सड़क को कागजों में बेहतर बताना आसान नहीं होगा। सिस्टम में सड़क निर्माण की प्रगति, स्वीकृत बजट, तय समय सीमा, सड़क की वर्तमान स्थिति, गड्ढे और मेंटेनेंस जैसे बिंदुओं की निगरानी होगी। जनता की शिकायतें कितनी मिली और उनका निर्धारित समय में निराकरण हुआ या नहीं, यह भी रिकॉर्ड में रहेगा।

70 हजार किमी सड़क का डिजिटल हेल्थ कार्ड

लोक निर्माण विभाग के रोड ऐसेट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए प्रदेश के करीब 70 हजार किलोमीटर लंबे सड़क नेटवर्क की डिजिटल हेल्थ रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जीआइएस तकनीक और नेटवर्क सर्वे वाहनों की मदद से सड़क की मजबूती और उसकी वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक डाटा जुटाया जाएगा। इससे सड़क की हालत का आकलन मौके के निरीक्षण के साथ-साथ डिजिटल आंकड़ों से भी हो सकेगा।

सबसे बड़ा फीडबैक जनता का

इस पूरी व्यवस्था में आम लोगों की शिकायतों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। सड़क पर समस्या है तो उसकी शिकायत दर्ज होगी और उसके समाधान की स्थिति भी सिस्टम में दिखाई देगी। यानी अब सड़क की असली परीक्षा फाइल में नहीं, जमीन पर उसकी हालत और जनता के फीडबैक से होगी। एमपीआरडीसी के डिविजनल मैनेजर के मुताबिक, सिस्टम की मॉनिटरिंग भोपाल स्थित मुख्यालय से की जा रही है। इससे प्रदेशभर में चल रहे सड़क और विकास कार्यों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी।

अच्छा काम करने वालों को सम्मान, खराब काम पर होगी कार्रवाई

अलग-अलग मानकों पर मिले आंकड़ों के आधार पर एजेंसियों और अधिकारियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा। बेहतर काम करने वालों को सम्मान और प्रोत्साहन मिलेगा, जबकि लगातार लापरवाही या खराब प्रदर्शन सामने आने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जा सकेगी।