
MP Personal Data Protection: अब निजी एजेंसी संभालेगी सुरक्षा की जिम्मेदारी (फोटो सोर्स- Magnific)
MP Personal Data Protection: प्रदेश में सरकारी योजनाओं और सेवाओं के ऑनलाइन होने के साथ करोड़ों नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा डिजिटल सर्वर पर एकत्रित हो चुका है। आधार, मोबाइल नंबर, बैंक खाते, परिवार की जानकारी, जमीन, पेंशन, रोजगार और योजनाओं से जुड़ा यह डेटा अब सरकार के लिए सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। समय-समय पर सरकारी और निजी प्लेटफॉर्म से डेटा लीक होने के आरोप भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) नियम लागू करने की तैयारी के बीच सरकार ने डेटा सुरक्षा के लिए निजी विशेषज्ञ एजेंसी की मदद लेने का निर्णय लिया है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के मप्र स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) ने कंसल्टिंग एजेंसी के चयन की प्रक्रिया शुरू की है। यह एजेंसी प्रदेश में डीपीडीपी एक्ट और नियमों के साथ डेटा सुरक्षा से जुड़े मानकों को लागू करने के लिए सरकार को परामर्श देगी। मौजूदा व्यवस्था का आकलन कर डेटा सुरक्षा में मदद करेगी। इस प्रक्रिया में करीब एक साल लगने की संभावना है।
प्लेटफॉर्म में है। इनमें मप्र ई-सेवा, किसान वेब पोर्टल, एमपी ई-एचआरएमएस, लाड़ली लक्ष्मी योजना 3.0. लाड़ली बहना, एमपी टास्क, समग्र 2.0, संबल 2.0, संपदा 2.0, इंटीग्रेटेड फॉरेस्ट प्रोड्यूस मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, लोकपथ एप, अल्पास, लैंड यूज सर्टिफिकेट, कॉलोनाइजर रजिस्ट्रेशन सिस्टम, हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम, पीएम आवास, यूनिपे और पीएम कुसुम सोलर पंप प्रोजेक्ट शामिल हैं।
प्रत्येक नागरिक को अपनी व्यक्तिगत जानकारी के उपयोग की अनुमति देने या अस्वीकार करने का अधिकार है। या वे किसी समय अपनी सहमति वापस भी ले सकते हैं।
कौन सा व्यक्तिगत डेटा एकत्र किया गया है. इसे क्यों लिया है और उपयोग कैसे किया जा रहा जानने का अधिकार है।
बच्चे का डेटा लेने के लिए माता-पिता या अभिभावक की सत्यापित सहमति आवश्यक है।
नागरिक अपने व्यक्तिगत डेटा की एक प्रति प्राप्त कर सकते हैं।
कुछ परिस्थितियों में व्यक्तिगत डेटा को हटाने, अपडेट करने का अनुरोध कर सकते हैं।
डेटा संरक्षक को नागरिकों के अनुरोध पर 90 दिनों की समय सीमा के भीतर कार्रवाई करनी होगी।
डेटा ट्रस्टीज को व्यक्तिगत डेटा से संबंधित प्रश्नों के लिए एक संपर्क सूत्र प्रदान करना होगा। यह एक नामित अधिकारी या डेटा संरक्षण अधिकारी हो सकता है।
चुनी गई एजेंसी सरकारी विभागों में वर्तमान डेटा प्रोसेसिंग गतिविधियों, सिस्टम, प्रक्रियाओं और गवर्नेस व्यवस्था का आकलन करेगी। इसके बाद डीपीडीपी कंप्लायंस गैप असेसमेंट रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें डेटा सुरक्षा की कमियां, संभावित जोखिम, प्राथमिकता वाले क्षेत्र और सुधार के उपाय बताए जाएंगे। इसके लिए एजेंसी को यह भी देखना होगा कि सरकार के पास किस तरह का व्यक्तिगत डेटा एकत्रित और प्रोसेस किया जा रहा है. उसका स्रोत क्या है और कौन-कौन सी श्रेणियों का डेटा मौजूद है। साथ ही डेटा लीक होने की स्थिति में कार्रवाई और जवाबदेही की व्यवस्था तय होगी।
एजेंसी का दूसरा प्रमुख काम कंसेंट मैनेजर की अवधारणा, योजना, डिजाइन और स्थापना के लिए परामर्श देना होगा। इसके जरिए नागरिक अपने व्यक्तिगत डेटा के उपयोग के संबंध में सहमति दे सकेंगे या उसे वापस ले सकेंगे। कंसेंट मैनेजर की वास्तविक स्थापना, तकनीकी विकास, स्टाफिंग, पंजीकरण, प्रमाणन, संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी एमपीएसईडीसी, मप्र शासन या उसके द्वारा नियुक्त एजेंसियों की होगी।
Updated on:
17 Sept 2026 09:46 am
Published on:
17 Sept 2026 09:45 am
