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जिस पितृ पर्वत पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का रेस्ट हाउस, उसकी फाइल नगर निगम से गायब !

Kailash Vijayvargiya Rest House: देवधरम टेकरी (पितृ पर्वत) का मूल मालिक नगर निगम है, जिसने 26 साल पहले हरियाली का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन संबंधित पूरी फाइल गायब है और रिकॉर्ड में यह देवधरम पानी की टंकी के नाम से दर्ज है।
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कैलाश विजयवर्गीय फोटो (Photo Source: Kailash Vijayvargiya fb account)

कैलाश विजयवर्गीय फोटो (Photo Source: Kailash Vijayvargiya fb account)

नितेश पाल की रिपोर्ट…..

Indore news: जिस देवधरम टेकरी (पितृ पर्वत) पर नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का रेस्ट हाउस बन चुका है। धर्मशाला निर्माणाधीन है। बटुकों को ठहराने के लिए हॉस्टल बनाया जा रहा है, उस देवधरम टेकरी का मूल मालिक नगर निगम है। नगर निगम ने 26 साल पहले यहां हरियाली उगाने का प्रस्ताव पारित किया था। लेकिन इससे जुड़ी पूरी फाइल ही नगर निगम से गायब है। इसी में पितृ-पर्वत से जुड़े प्रस्तावों की पूरी जानकारी है। दो दशक से गायब इस फाइल को ढूंढ़ने की कोशिश भी नहीं की गई। निगम के रिकॉर्ड में पितृ-पर्वत नाम की कोई जगह नहीं है। रिकॉर्ड में पूरी पहाड़ी देवधरम पानी की टंकी के नाम से दर्ज है। इसलिए निगम के 2000 में आए प्रस्तावों में भी इसे देवधरम पानी की टंकी के नाम से ही संबोधित किया गया है।

प्रस्ताव में थी ये व्यवस्था

वर्षा ऋतु तथा रविवार एवं अवकाश के दिनों में पितृ पर्वत पर निगम के पदाधिकारी-पार्षद एवं उद्यान विभाग के कर्मचारी पितृ पर्वत पर रहेंगे। जनसामान्य को सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे। यहां हरियाली और अन्य खर्चों को नगर निगम के व्यय मद क्रमांक 942064 बगीचों व मनोरंजन स्थलों का मेंटेनेंस 40 लाख रुपए के किए प्रावधान से करने के लिए आयुक्त को अधिकृत किया गया। मेयर इन काउंसिल कामकाज संचालन नियम 1998 के प्रावधान धारा 6 (3) के अन्तर्गत पोस्टर /बैनर / टेंट / ध्वनि व्यवस्था एवं साज संगीत व अन्य व्यवस्थाएं कोटेशन लेकर न्यूनतम भाव पर करने की स्वीकृति दी गई।

जिसके पास थी फाइल, उनका हो चुका निधन

बताते हैं यह फाइल अफसर संतोष मोदी के पास थी। यह रिकॉर्ड में है। वे निगम में सचिव का कार्यभार भी संभाल चुके थे। उनका काफी पहले ही निधन हो चुका है। देवधरम टेकरी को लेकर निगम रिकॉर्ड में कोई प्रस्ताव यदि आया था तो दिसंबर 2000 में परिषद से पारित ये आखिरी प्रस्ताव था। इसके बाद किसी बैठक में देवधरम टेकरी को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं आया है। न ही यहां हरियाली को लेकर और न ही इस जमीन को किसी अन्य को देने का कोई प्रस्ताव नगर निगम में नहीं है।

निगम के बेपरवाह सिस्टम का पूरा खेल ऐसे समझें

-निगम के आधिपत्य वाली देवधरम टेकरी पर हरियाली का प्रस्ताव पहली बार 26 जून 2000 को तत्कालीन महापौर परिषद में आया था। एमआइसी संकल्प क्रमांक-133 के प्रस्ताव में यहां पौधरोपण का प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव को 4 जुलाई 2000 में हुई निगम की परिषद बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 80 के तौर पर पेश किया और स्वीकृति मिल गई।

-नाम ऐसा से ही प्रस्ताव संकल्य-400 20 सितंबर केब 2000 को एमआइसी में आया। इसमें टेकरी पर जनभागीदारी से शहरवासियों से परिजनों की याद में पौधरोपण का प्रस्ताव था। पौधा देने व देखरेख के लिए निगम ने 251 रुपए शुल्क लेने की बात कही थी। इसी में इसे पितृ-पर्वत योजना का नाम दिया। इस संकल्प को प्रस्ताव-161 के तौर पर 22 दिसंबर 2000 को परिषद में रखा, मंजूरी मिली।

-क्रमांक 409 व परिषद के प्रस्ताव क्रमांक 161 से जुड़ी फाइल निगम में नहीं है। निगम रिकॉर्ड में इतनी ही जानकारी है कि फाइल विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी संतोष मोदी को दी थी। लेकिन मोदी के पास से फाइल निगम नहीं आई। 26 साल में निगम ने इस फाइल को लाने व प्रस्ताव से जुड़े कार्यालयीन दस्तावेज गायब होने पर एफआइआर भी नहीं कराई।