Mp electricity bill: एमपी के करोड़ों उपभोक्ताओं की जेब पर हर साल डाका, बिजली कंपनियां पिछले 10 साल से लगातार दिखा रहीं घाटा, लगातार बढ़ा रहीं टैरिफ, अब जांच की मांग...
Mp electricity bill hike due to tariff hike: मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं की जेब हर साल ढीली की जा रही है। बिजली वितरण कंपनियों के सिस्टम के सुराख को पाटने की बजाय नियामक आयोग बिजली दरों में वृद्धि कर हर साल 1.90 करोड़ उपभोक्ताओं पर बोझ डाला जा रहा है। कंपनियां हर साल नुकसान का दावा कर दरें बढ़ाने का प्रस्ताव देती हैं। इस बार भी कंपनियों ने 6044 करोड़ का घाटा बताकर इससे उबरने के लिए बिजली टैरिफ में 10.2 फीसदी की वृद्धि की मांग की है।
आयोग ने घाटा माना और 4.80 फीसदी बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। अब नया टैरिफ अप्रैल से लागू होगा और 200 यूनिट की खपत पर हर माह लोगों को 80 रुपए ज्यादा चुकाने होंगे। जानकारों की मानें तो, प्रदेश में बिजली की खरीदी और कंपनियों के नुकसान के दावों को क्रॉस चेक करने के लिए प्रभावी सिस्टम ही नहीं है। वितरण कंपनियों के बेलगाम खर्चों पर प्रभावी नियंत्रण की कमी भी लगातार बनी हुई है।
प्रभारी के भरोसे आयोग टैरिफ वृद्धि की मंजूरी देने वाले मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के पास भी पर्याप्त अमला नहीं है। इस बार आयोग के दो सदस्य गोपाल श्रीवास्तव व गजेंद्र तिवारी ने ही अहम निर्णय लिया। श्रीवास्तव के पास चेयरमैन का भी प्रभार है।
15 माह से आयोग के पास नियमित अध्यक्ष नहीं है। हर साल कंपनियां आयोग में नुकसान का दावा करती हैं। आयोग कुछ फीसद छोड़ बाकी नुकसान मान लेता है। मैदानी स्तर पर नुकसान नहीं जांचता।
-राजेन्द्र अग्रवाल, रिटायर्ड अतरिक्त. मुख्य अभियंता
कांग्रेस ने प्रदेश में बिजली दरों में 4.80 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर विरोध दर्ज कराया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सीएम को पत्र लिखकर बिजली दरों में वृद्धि को तत्काल वापस लेने, बिजली कंपनियों के घाटे की स्वतंत्र जांच कराने और फ्यूल चार्ज जैसे अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने लिखा कि पिछले एक दशक में प्रदेश में 22 से 24 फीसदी तक बिजली दरों में वृद्धि हो चुकी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 0-50 यूनिट की दर 3.65 से बढ़कर 4.45 रुपए हो गई, यानी सीधा 20 फीसदी का इजाफा हुआ। हर महीने य़ूल सरचार्ज के नाम 3 फीसदी से अतिरिक्त बोझ भी डाला जा रहा है। जीतू ने कहा, अब जनता को दरों में बढ़ोतरी स्वीकार नहीं है, यदि यह फैसला वापस नहीं हुआ तो कांग्रेस आंदोलन करेगी।