भोपाल

Nipah virus की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी, रखें इन बातों का ध्यान

स्वास्थ्य विभाग ने जारी की
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May 27, 2018
alert on Nipah virus
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भोपाल. केरल में पिछले दिनों निपाह वायरस से हुई बीमारी और इसके कारण मौत की घटनाओं को देखते हुए मध्यप्रदेश में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। राज्य शासन ने निपाह वायरस बीमारी की रोकथाम और उपचार के लिये भारत शासन की गाइड लाइन प्रदेश के सभी सीएमएचओ और सिविल सर्जनों को भेज दी है।

विभाग ने आगाह किया है कि केरल से आने वाले लोगों के इलाकों और बड़ी चमगादड़ की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में निपाह के लक्षण पाये जाने पर तत्काल निकट के शासकीय अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराएं। निपाह वायरस सामान्यत बड़ी चमगादड़ और ***** के माध्यम से मनुष्यों में फैलने वाला संक्रामक रोग है।

निपाह के सामान्य लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, खाँसी, साँस लेने में तकलीफ, उल्टी, दस्त, बेहोशी, सुस्ती आना आदि शामिल हैं। संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. बी.एन. चौहान ने बताया कि सामान्य रूप से यह बीमारी सीमित क्षेत्र में होती है। बीमारी से बचाव के लिए बड़ी चमगादड़ों द्वारा खाए हुए फलों और ताड़ी आदि का सेवन न करें। ऐसे स्थानों पर जाने से बचें, जहाँ बड़ी चमगादड़ की मौजूदगी है। निपाह के संदिग्ध मरीज से भी दूरी बनाकर रखें।

केरल में चमगादड़ से फैलने वाले खतरनाक निपाह वायरस ने आतंक मचा रखा है। अब तक करीब एक दर्जन लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। कर्नाटक, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश में भी इसके फैलने की खबरों से हडक़ंप मच गया है। वहीं इसने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की भी चिंता बढ़ा दी है।

मंत्रालय की ओर से एक एडवाइजरी जारी कर सभी राज्यों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। क्‍या है निपाह वायरस? विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक निपाह एक ऐसा वायरस है जो चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है। यह जानवरों और इंसानों दोनों में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। इस वायरस का मुख्‍य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट) हैं।

इन्हें फ्लाइंग फॉक्स के नाम से भी जाना जाता है। निपाह वायरस के लक्षण निपाह वायरस के लक्षण दिमागी बुखार की तरह ही हैं। बीमारी की शुरुआत सांस लेने में दिक्‍कत, चक्कर आना, तेज सिरदर्द और फिर बुखार से होती है है। इसके बाद बुखार दिमाग तक पहुंच जाता है, जिससे मरीज की मौत भी हो सकती है। क्या इसका इलाज संभव है हालांकि, अब तक इस भयानक निपाह वायरस का कोई वैक्‍सीन नहीं बन पाया है। बचाव ही इसका एकमात्र इलाज है। इससे संक्रमित रोगी की उचित देखभाल और डॉक्‍टरों की कड़ी निगरानी में रखा जाना चाहिए।

यह रखें सावधानियां

1. चमगादड़ों की लार या पेशाब के संपर्क में न आएं

2. संक्रमित इंसानों और पशुओं खासकर सुअरों के संपर्क में न आएं

3. पेड़ से नीचे गिरे फलों को खाने से बचें

4. निपाह वायरस के अधिक प्रभाव वाले इलाकों में नहीं जाएं

5. इस्तेमाल में नहीं लाए जा रहे कुओं में पर जानें से बचें

6 केरल सहित उसके पड़ोसी राज्यों से आने वाले फल जैसे केला, आम व खजूर खाने से परहेज करें

7. फलों को पोटाश वाले पानी में धोकर खाएं

8. निपाह वायरस के लक्षण पाए जाने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं

Published on:
27 May 2018 08:22 am