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MP UCC मसौदा अब भी पर्दे में, कमेटी की बैठक के बाद सामने आए 5 बड़े सवाल

MP UCC Big Questions: मध्य प्रदेश में UCC को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सरकार ज्यादा से ज्यादा जनसमर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है, लेकिन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है विविधता पूर्ण राज्य में संतुलित रूप से इसे लागू करना। UCC समिति बीते कल हुई बैठक में विभिन्न वर्गों से सुझाव ले चुकी है, लेकिन कई अहम सवाल हैं, जिनके जवाब का लोग इंतजार कर रहे हैं...

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MP UCC Bill

MP UCC Bill: मध्यप्रदेश सरकार के यूसीसी बिल के लागू होने से पहले उठे 5 बड़े सवाल। (फोटो सोर्स: डॉ. मोहन यादव X हैंडल)

MP UCC Big Questions: मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारियां करीब-करीब अंतिम चरण में है। सरकार घोषणा कर चुकी है कि इसी मानसून सत्र 2026 में इसे लागू करेगी। मध्य प्रदेश सरकार यूसीसी बिल को महिलाओं के अधिकार, सामाजिक समानता के साथ ही समान नागरिक व्यवस्था की दिशा में अहम कदम मान रही है। फिलहाल मसौदा सार्वजनिक होने से पहले ही कई सवालों में घिरा है। दरअसल UCC का सीधा असर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और पारिवारिक कानूनों पर पड़ सकता है। मध्य प्रदेश एक विविधता से संपन्न राज्य है। ऐसे में UCC कानून को यहां किस स्वरूप में लागू किया जाएगा लोगों की नजरें इसी पर टिकी हैं। जबकि वर्तमान में इसका पूर्ण समर्थन करने वालों में अकेली भाजपा ही है। वहीं कांग्रेस ने इस मामले पर हुई बैठक का वॉक आउट कर चुकी है।

1. क्या आदिवासी परम्पराओं को छूट देगी सरकार?

मध्य प्रदेश (MP UCC Big Questions) की एक बड़ी आबादी आदिवासी क्षेत्रों से है। इनकी अपनी परम्पराएं और पारंपरिक विवाह, पारिवारिक और व्यावहारिक तौर पर सामाजिक व्यवस्थाएं हैं। सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या UCC में इनकी परम्पराओं को विशेष संरक्षण दिया जाएगा या सभी नागरिकों की तरह इन पर भी एक समान नियम लागू किए जाएंगे?

2. लिव इन रिलेशनशिप पर क्या होंगे नियम?

यह भी सामने आया है कि लिव इन में रहने वालों को अब 30 दिन के अंदर पंजीयन करवाना अनिवार्य किया गया है। कुछ सामाजिक संगठन इस नियम का विरोध कर रहे हैं, उनका मानना है कि इस नियम से लिव इन रिलेशनशिप को बढ़ावा मिलेगा। जबकि UCC मसौदे के मुताबिक यह पंजीयन इसलिए अनिवार्य किया गया है ताकि अगल होने के बाद किसी भी स्थिति में महिला अपने प्रेमी के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप न लगा सके। ऐसे में पुरुषों को फेक रेप केसेस से भी सुरक्षा मिलेगी। वहीं फाइनल ड्राफ्ट में कई प्रावधान करते हुए यह रजिस्ट्रेशन इसलिए भी जरूरी बताया जा रहा है ताकि ऐसे बच्चों को वे सभी विरासती अधिकार मिलें जैसे किसी सामान्य बच्चों के होते हैं। हालांकि UCC लागू होने से पहले ये नियम चर्चा में हैं और लोगों के सवाल हैं कि ये नियम कैसे लागू किया जा सकेगा?

3. क्या हर किसी की शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा?

विवाह पंजीयन को लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है कि UCC में विवाह पंजीयन अनिवार्य होने से बाल विवाह, फर्जी विवाह और कानूनी विवादों पर नियंत्रण का प्रयास किया गया है। लेकिन सवाल ये है कि क्या राज्य सरकार ने सभी समुदायों के लिए इसे अनिवार्य किया है? अगर हां तो फिर इसकी प्रक्रिया क्या होगी?

4. उत्तराधिकार और संपत्ति को लेकर नियम कितने बदलेंगे?

UCC का सबसे बड़ा असर उत्तराधिकर और संपत्ति नियमों को लेकर भी उठा है। क्योंकि यदि UCC के तहत एक समान नियम लागू किए गए, तो पुराने संपत्ति और उत्तराधिकार मामलों के प्रावधान पर भी इसका असर पड़ेगा और वे भी बदल जाएंगे। लोगों की उत्सुकता इसी बात को लेकर है कि फाइनल मसौदे में मध्य प्रदेश सरकार क्या व्यवस्था करने जा रही है?

5. महिलाओं के किन अधिकारों को किया जा रहा UCC में शामिल?

बता दें कि राज्य सरकार लगातार कह रही है कि UCC महिलाओं को समान अधिकार देने की दिशा में
बड़ा कदम है। लेकिन अंतिम कानून में भरण-पोषण, संपत्ति और पारिवारिक अधिकारों के मामले कौन-कौन से नए प्रावधान जोडे़ गए हैं, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है। मसौदे में क्या होगा?

यह बहस क्यों महत्वपूर्ण?

दरअसल मध्य प्रदेश में UCC को केवल कानूनी नहीं बल्कि एक बड़े सामाजिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। UCC के समर्थक इसे समानता की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं। जबकि कई समुदाय या समूह पारंपरिक व्यवस्थाओं और सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण की बात कर रहे हैं। ऐसे में विधान सभा में विधेयक आने से पहले इन पांच सवालों के जवाब जानना लोगों के लिए बड़ी दिलचस्पी का विषय बना हुआ है।

UCC कमेटी ले चुकी है सुझाव

बता दें कि सोमवार 22 जून 2026 को UCC पर एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता वाली इस बैठक में आदिवासी रीति-रिवाजों और पारंपरिक कानूनों पर मंथन किया गया। महिला अधिकार और उत्तराधिकर संबंधी मुद्दों पर बात की गई। विवाह पंजीकरण और पारिवारिक कानूनों को लेकर सुझाव दिए गए। विभिन्न सामाजिक और धार्मिक समूहों की राय ली गई। मसौदा तैयार करने से पहले सरकार ज्यादा से ज्यादा जनसहमति जुटाने के प्रयास कर रही है। लेकिन फिलहाल अंतिम ड्राफ्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। .ऐसे में सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती कानून बनाना नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों पर संतुलित रूप से इसे लागू करना है। लेकिन इससे पहले कई अहम सवाल हैं, जिनका इंतजार लोगों को बेसब्री से है।