
MP Ministers :केन्द्र और राज्य सरकार फिजूलखर्ची रोकने और मितव्ययिता अपनाने के लिए कह रही हैं। वित्तीय प्रबंधन को संभालने के लिए विभागों को कई गतिविधियां प्रतिबंधित करने सहित कुछ निर्देश जारी किए थे, लेकिन इनका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। अभी तक विभागों में न तो व्हीकल पूलिंग शुरू हुई है और न लग्जरी कार्यक्रमों पर रोक लगी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद कई मंत्रियों ने अपना काफिला कम करने के साथ पायलट वाहन हटा दिया था लेकिन अब फिर से माननीयों के आगे पायलट फर्राटे भरते नजर आ रहे हैं। कई सरकारी कार्यक्रम भी धड़ल्ले से महंगे होटलों में आयोजित किए जा रहे हैं।
5.36 लाख करोड़ हुआ सरकार पर कर्ज:
एमपी सरकार इस वित्त वर्ष के पांच महीने में ही 47,800 करोड़ रुपए कर्ज ले चुकी है। हालत यह है कि हर बार लाड़ली बहनाओं की किस्त जारी करने के पहले कर्ज लेना पड़ रहा है। 31 मार्च 2026 की स्थिति में राज्य सरकार पर 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपए का कर्ज था। चालू वित्त वर्ष में अब तक लिए गए 47,800 करोड़ रुपए के नए कर्ज के बाद यह बढ़कर 5 लाख 36 हजार 514 करोड़ रुपए हो गया है।
राज्य के कई मंत्री और खासतौर पर निगम-मंडल अध्यक्षों में अभी भी काफिले की होड़ लगी हुई है। पायलट वाहन भी साथ चल रहे।
उच्चाधिकारियों ने भी विभाग के दो या उससे अधिक वाहन ले रखे हैं, हाल ही में जनजातीय विभाग में संचालक द्वारा 6 वाहन अपने पास रखने का खुलासा हुआ था।
विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 13 जुलाई को एमपी टेक ग्रोथ कॉन्लेक्व 5-स्टार होटल में हुई। जबकि राजधानी में कंवेंशन सेंटर, रवीन्द्र भवन में आसानी से यह आयोजन हो सकता था।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने 10 सदस्यों को बेंगलूरु, मुंबई और हैदराबाद के 3 दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर भेजा, इस पर लाखों रुपए खर्च हुए।
विभागों और सरकारी उपक्रमों में किराये के वाहन संख्या सीमित कर, वाहनों को पूल करना और आवंटन को युक्तियुक्त करना था। लेकिन अभी तक यह भी नहीं किया गया। वाहनों की पूलिंग भी शुरू नहीं हुई।
मंत्रियों और अधिकारियों के बंगलों और कार्यालयों की साज- सज्जा भी पहले की तरह जारी है, निगम-मंडलों के अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों द्वारा अपनी इच्छानुसार कार्यालय और बंगलों का इंटीरियर कराया जा रहा है।
नगरीय विकास, लोक निर्माण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वाणिज्यिक कर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सहित अन्य विभागों में कंसल्टेंसी सर्विसेज जारी हैं।
सबसे बड़ी फिजूलखर्ची तो सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के कार्यालयों के रिनोवेशन और साज-सज्जा पर चल रही है। क्योंकि हाउसिंग बोर्ड जहां सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर अरेरा हिल्स पर विकास करने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुका है, इसमें सतपुड़ा और विंध्याचल भवनों को तोड़ा जाना है, इसके बावजूद यहां कार्यालयों का रिनोवेशन जारी है। पिछड़ा वर्ग, घुमंतू, अद्र्धघुमंतू विभाग, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य विभाग आदि के कार्यालयों में रिनोवेशन जारी है।
राज्य सरकार या उसके उपक्रमों के खर्च पर होने वाली सभी विदेश यात्राओं पर।
नए साल या अन्य उत्सवों पर छपने वाले महंगे सरकारी कैलेंडर, डायरी के मुद्रण और क्रय पर।
वीआईपी उपहारों व स्वागत समारोहों के आयोजन पर।
अधिकारियों के बिजनेस क्लास में हवाई यात्रा पर।
होटल तथा अन्य व्यावसायिक संस्थाओं आदि में कार्यशाला, बैठक, प्रशिक्षण पर भी वित्त विभाग ने रोक लगाई है।