
Stent inserted: बच्चे और स्टंट की प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - AI or freepik )
Bhopal news:एमपी के भोपाल शहर में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया। यहां पर महज 12 दिन की उम्र, वजन सिर्फ 2.1 किलो और ऑक्सीजन स्तर 55 प्रतिशत बच्चे में जटिल समस्याएं देखने को मिली। बता दें कि पैदा होने के तुरंत बाद जटिल हृदय रोग से जूझ रहे नवजात की सांसें थमने लगी थीं। बड़ी सर्जरी के लिए उसका वजन और स्थिति अनुकूल नहीं थी।
ऐसे नाजुक वक्त में एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने बच्चे के हॉर्ट में स्टंट लगाकर उसके जीने का रास्ता खोल दिया। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी टीम के डॉक्टरों ने नवजात की आरवीओटी स्टेंटिंग कर फेफड़ों तक रक्त पहुंचने का रास्ता खोल दिया। मध्य भारत में पहली बार ऐसा हुआ है। प्रक्रिया के बाद ऑक्सीजन स्तर 88 प्रतिशत पहुंच गया और अगले ही दिन शिशु को वेंटिलेटर से हटा दिया गया।
डॉ. भूषण शाह ने बताया, गंभीर स्थिति और वजन बहुत कम होने के कारण बड़ा ऑपरेशन करना जोखिम भरा था। आरवीओटी स्टेंटिंग से बिना बड़ी सर्जरी किए फेफड़ों तक रक्त प्रवाह बढ़ाया जा सका। इससे शिशु को स्थिर होने और वजन बढ़ाने का समय मिलेगा। यह अंतिम बड़ी सर्जरी तक शिशु को सुरक्षित अस्थायी व्यवस्था है। शारीरिक विकास और स्वास्थ के अनुसार अनुसार छह माह की आयु में बड़ी सर्जरी की योजना बनाई जाएगी।
नवजात को जन्म से जटिल डबल आउटलेट राइट वेंट्रिकल था। हृदय से फेफड़ों तक रक्त वाली नली बहुत संकरी थी। फेफड़ों का विकास भी सामान्य से कम था। बच्चा जन्म के बाद से सही से सांस भी नहीं ले पा रहा था। जन्म के समय शिशु का ऑक्सीजन स्तर 85 से 90 प्रतिशत था। ये धीरे-धीरे गिरकर 12वें दिन 55 प्रतिशत हो गया।
उम्र और वजन कम होने बच्चे की स्थिति गंभीर होने का खतरा था। शिशु की तत्काल बड़ी सर्जरी करना बड़ा जोखिम हो सकता था। डॉक्टरों ने हार्ट से फेफड़ों तक जाने वाले संकरे रास्ते में डालने का निर्णय लिया। स्टेंट डालने पर फेफड़ों तक रक्त प्रवाह सामान्य हो गया। फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर है और वजन भी बढ़ रहा है।
Updated on:
26 Aug 2026 01:01 pm
Published on:
26 Aug 2026 01:00 pm
