Bear Mother Cub Reunion: सात दिन पहले जिस जगह से घायल भालू के शावक का रेस्क्यू किया था, वहीं आकर बैठती थी मां...
MP News Bear Mother Cub Reunion: शहर से लगे कल्याणपुर की उस खामोश पहाड़ी पर पिछले कई दिनों से एक अजीब सी हलचल थी। हर सुबह, हर शाम एक मादा भालू उसी तारबंदी के पास आकर रुकती, सूंघती, टोह लेती और फिर मायूस लौट जाती। न कोई दहाड़, न हमला बस तलाश, अपने बच्चे की। मां की ममता ने हर किसी का मन द्रवित कर दिया। जानकारी वन विभाग तक पहुंचाई गई तो भालू के बच्चे को उसी जगह पहुंचा दिया, जहां पर घायल अवस्था में मिला था, जो अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है।
दरअसल, 27 जनवरी को भोपाल के कल्याणपुर में पौधरोपण के लिए लगी फेंसिंग में एक भालू का शावक उलझकर घायल हो गया था। सूचना पर वन विभाग ने समय रहते रेस्क्यू कर उसे इलाज के लिए वन विहार भेज दिया। इंसानी नजरों में यह एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन था, लेकिन एक मां के लिए यह सिर्फ एक सवाल था, मेरा बच्चा कहां है। ग्रामीण बताते हैं कि रेस्क्यू के बाद भी मादा भालू रोज उसी जगह आती रही। कभी झाडिय़ों के बीच झांकती, कभी जमीन पर पंजों से खरोंचती, मानों बच्चे की गंध ढूंढ रही हो।
वन विहार में शावक का इलाज चल रहा था। डॉक्टर अमित ओढ. और डॉ. विनीत पाल की निगरानी में शावक की चोटें भरने लगीं। क्वारंटाइन में वह सुरक्षित था, स्वस्थ हो रहा था, लेकिन कहानी यहीं पूरी नहीं हुई, क्योंकि यह सिर्फ इलाज की नहीं, मिलन की कहानी थी। जब वन विभाग को यह जानकारी मिली कि मादा भालू लगातार उसी जगह लौट रही है, तो फैसला तुरंत लिया गया। मंगलवार देर रात, अंधेरे और सन्नाटे के बीच, उसी कल्याणपुर बीट में शावक को वापस छोड़ा गया, ठीक वहीं, जहां उसकी मां चार दिन से इंतजार कर रही थी।
बताया गया है कि भालू शावक को छोड़ के आने के बाद का कोई फोटो नहीं है, कोई वीडियो नहीं, लेकिन सुबह शावक नहीं नजर आया, इससे यह लगता है कि उसे मादा भालू अपने साथ ले गई। यह घटना सिर्फ वन्यप्राणी संरक्षण की मिसाल नहीं है, बल्कि यह याद दिलाती है कि ममता किसी प्रजाति की मोहताज नहीं। इंसान हो या भालू, मां का दिल एक सा होता है, अपने बच्चे के लिए बेचैन, अडिग और उम्मीद से भरी हुई।