भोपाल

‘दिग्विजय के मॉडल’ को पूर्व मंत्री ने बताया ‘अधकचरा’, जानिए क्या है सच्चाई

MP News: सोमवार को दिग्विजय सिंह ने एक कार्यक्रम में साल 2002 के एजेंडे पर बात की। उस मॉडल पर बात करते हुए पूर्व मंत्री ने अधकचरा करार दे दिया।

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Jan 12, 2026
फोटो सोर्स- पत्रिका

MP News: राज्यसभा सांसद और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में भोपाल-2 दलित एजेंडे पर चर्चा की और नया ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कहा। दिग्विजय सिंह ने कहा कि भोपाल डिक्लेरेशन दलित एजेंडा नहीं था, उसमें अनुसूचित जाति के साथ अनुसूचित जनजाति के लिए भी था। वहीं, इस मॉडल को पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने अधकचरा बताया।

क्या था दिग्विजय सिंह का पूरा बयान

सभा में राज्यसभा सांसद और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा कि इमरजेंसी के साथ एससी/एसटी के लोगों को गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप दिए गए। अब समय आ गया है GenZ 2000 के बाद पैदा हुए हैं। उनसे भी चर्चा करने की जरूरत है। यूथ पॉलिसी बननी चाहिए। साल 2002-23 में शासकीय खरीद में आरक्षण दिया गया। जिसमें डिप्लोमा और डिग्री होल्डर को बिना टेंडर काम दिया गया। मप्र चेप्टर का ड्राफ्ट तैयार किया है।

सुक्षाव के लिए भाजपा विधायकों को आमंत्रण

सुझाव के लिए बड़ी बैठक बुलाई गई है। जिसमें भाजपा विधायकों को आंमत्रित किया गया है। जिसमें संविधान, लोकतंत्र को लेकर चर्चाएं होंगी।

एससी/एसटी का सीएम बनेगा तो खुशी होगी

साल 2002 का एजेंडा फेल होने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि सरकार को कम समय मिला था। डेढ़ साल कम होता है। कई विषयों में लाभ मिला, लेकिन सरकारी जमीनों पर दबंगों का कब्जा था। दबंगों को हटाकर गरीबों को पट्टा दिए गए थे। इससे ग्रामीणों क्षेत्रों को अधिक नुकसान पहुंचा। सरकार जाने के बाद पट्टे भी कैसिंल हो गए थे। जब कमलनाथ सरकार आई तो पट्टा वापस दिलाने के लिए अभियान चलाया। आगे दिग्विजय सिंह ने कहा कि अगर एससी/एसटी का सीएम बनता है तो मुझे प्रसन्नता होगी।

सरकार आई तो परमानेंट होंगे अतिथि शिक्षक

सिंह ने यह दावा किया कि यदि कांग्रेस सरकार आएगी तो अतिथि शिक्षकों को परमानेंट करेंगे। हम इन लोगों को नियमित करने की नीति तैयार करेंगे।

दिग्विजय सरकार का एजेंडा फेल

पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि दलित एजेंडा फेल होने के कारण तीसरी बार दिग्विजय सरकार नहीं बन पाई। उस वक्त सरकार ने एससी/एसटी के उत्थान के लिए कदम उठाया था। दलित एजेंडा 2002 में लागू किया। दलित एजेंडा पवित्र मन से लाया गया था लेकिन अधकचरा था। इसे फेल करने में अधिकारियों ने भूमिका निभाई थी। अफसरों ने जमीन देने में 12-15 हजार पट्टे बना लिए, लेकिन अब तक कोई लाभ नहीं मिला। उस दौरान ये सही तरीके से इंप्लीमेंट नहीं हो पाया। इसलिए दलित एजेंडा 2 आना पड़ा। दिग्विजय सिंह ने पवित्र मन से लागू किया। अधिकारियों से भी चूक हुई। जिस कारण हमारी सरकार नहीं बन पाई।

Updated on:
12 Jan 2026 07:25 pm
Published on:
12 Jan 2026 07:23 pm
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