MP News: मध्य प्रदेश में विधासभा बजट सत्र के दौरान भाजपा के दिग्गज नेता आमने-सामने आ गए।
MP News: मध्य प्रदेश में इन दिनों विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। चौथे दिन सदन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी के एक सीनियर विधायक ने अपनी ही सरकार में मंत्री को घेर लिया।
दरअसल, सदन में भाजपा विधायक अजय विश्नोई ने जबलपुर शहर में जल संकट को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को आड़े हाथों ले लिया। विधायक ने आरोप लगाया कि जबलपुर में मां नर्मदा के होने के बावजूद जनता प्यासी और अधिकारी फाइलों में झूठी योजनाएं दिखाकर सरकार को गुमराह करने का काम कर रहे हैं।
विधायक यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा कि एशियन डेवलपमेंट बैंक के दबाव में अधिकारियों ने फाइलों पर तो योजनाओं को पूरा दिखा दिया, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और ही है। आगे विश्नोई ने कहा कि कई इलाकों में कर्मचारी तक तैनात नहीं हैं और जनता के बीच सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश है। इसके तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ विकास का दावा नहीं है। बल्कि लूट का एक नया रास्ता खोल दिया गया है।
अजय विश्नोई के तीखे तेवर देख मंत्री कैलाश ने कहा कि विधायक को अपनी जानकारी दुरुस्त करनी चाहिए। सरकार के द्वारा जारी योजनाएं चल रही हैं और पर्याप्त पानी सप्लाई हो रहा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा शहर के अंदर डबल सिस्टम के जरिए पानी सप्लाई हो रहा है। साथ ही मांग से 28 फीसदी अधिक पानी दिया जा रहा है। इसमें विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि निकायों द्वारा समय पर बिजली बिल और जनप्रतिनिधियों के द्वारा अड़ंगा लगाया जाता है।
कैलाश विजयवर्गीय ने सरकार का बचाव किया तो अजय विश्नोई और भड़क गए और कहा कि मंत्री दी जानकारी कम है। अजय विश्नोई ने कहा कि पुरानी योजनाओं और प्लानिंग पर कुछ काम नहीं हुआ। अधिकारी केवल नई योजनाओं की बातें करके गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने सदन में सवाल पूछा कि अगर पर्याप्त पानी की आपूर्ति की जा रही है तो जनता क्यों परेशान है? इस पर मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को नलकूप बंद करा देने चाहिए। इस पर विधायक ने जवाब दिया कि नलकूप को बंद कराना सरकार की जिम्मेदारी है। विधायक की नहीं।
दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक तीखी नोंकझोंक चली। इसके बाद मंत्री कैलाश ने कहा कि वह विधायक की चिंताओं को समझते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जबलपुर की जल समस्या का समाधान जल्द से जल्द किया जाएगा। कैलाश ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग भी जरूरी है।
हालांकि, सदन में हुई बहस में यह स्पष्ट हो गया है कि जबलपुर में पानी का संकट कितना गंभीर है।