MP tiger rewilding Centre: देश का पहला टाइगर रिवाइल्डिंग सेंटर शुरू, आम भाषा में इसे बाघों का अनाथालय भी कहा जा रहा है। ये उन बाघ शावकों के लिए है, जो किसी भी कारणवश अपनी मां से बिछड़ जाते हैं...
MP tiger rewilding Centre: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले से वन्यजीव संरक्षण की अनोखी और बड़ी खबर सामने आई है। यहां देश का पहला टाइगर रिवाइल्डिंग सेंटर शुरू किया गया है। आम भाषा में इसे बाघों का अनाथालय भी कहा जा रहा है। ये उन बाघ शावकों के लिए है, जो किसी भी कारणवश अपनी मां से बिछड़ जाते हैं या फिर जंगल में अकेले रह जाते हैं। लेकिन यह केंद्र केवल देखभाल तक सीमित नहीं होता, बल्कि यहां नन्हें शावकों को पूरी तरह जंगल के तौर-तरीके सिखाए जाएंगे।
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक लक्ष्य ये है कि इन बाघों को इंसानों पर निर्भर बनाए बिना दोबारा जंगल में छोड़ा जा सके और इन्हें वहां जीने के लिए किसी तरह का कोई संघर्ष न करना पड़े। इन शावकों को जंगली बनाने के लिए प्राकृतिक माहौल दिया जाता है। इसके लिए विशेष एंक्लोजर तैयार किए गए हैं।
यहां लाए जाने वाले शावकों को पहले क्वारंटीन एरिया में रखा जाएगा। ताकि उनकी सेहत पर नजर रखी जासके। इसके बाद उन्हें बड़े बाड़ों में शिफ्ट किया जाएगा। जहां शिकार करना, छिपना, सतर्क रहना और अपने इलाकों की पहचान करना सिखाया जाएगा। धीरे-धीरे मानव संपर्क कम किया जाएगा, ताकि उनमें जंगली स्वभाव विकसित हो सके।
जब विशेषज्ञों को लगेगा कि बाघ शावक खुद शिकार करने और जंगल में जीवित रहने में सक्षम होंगे। तब उन्हें चरणबद्ध तरीके से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। रिहाई से पहले उन्हें रेडियो कॉलर पहनाई जाएगी। इसके माध्यम से उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी।
मध्य भारत का सतपुड़ा टाइगर रिजर्व एरिया जैव विविधता के लिए जाना जाता है। ऐसे में यह रिवाइल्डिंग सेंटर न सिर्फ बाघों की संख्या बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को भी कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। बता दें कि अब तक अनाथ शावकों को अक्सर किसी जू या चिड़ियाघर में या फिर रेस्क्यू सेंटरों में रखा जाता था, लेकिन यह मॉडल उन्हें आजादी से जीने का मौका देगा। इस पर वन्यजीव एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह पहल भविष्य में देश के अन्य टाइगर रिजर्व के लिए भी उदाहरण बन सकती है।