भोपाल

MP Wild Life: अब आदमियों की निगरानी में रहेंगे बाघ, आप भी जान जाएंगे कहां है ‘इंसानों का शिकारी’

जंगल से बाहर निकलते बाघों को बचाने और मानव द्वंद्व रोकने के लिए पहली बार आम लोग बाघों की निगरानी कर रहे हैं। प्रयोग के तौर पर भोपाल सामान्य वन मंडल के मेंडोरा, समरधा, प्रेमपुरा, रातापानी अभयारण्य के झिरी व सीहोर के खारी व आमला में निगरानी हो रही है...
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Updated: 31 Dec 2023, 3:12 PM IST
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MP News: जंगल में लगाए ट्रैप कैमरे के बारे में आम लोगों को निगरानी के गुर सिखाते ट्रेनर।

जंगल से बाहर निकलते बाघों को बचाने और मानव द्वंद्व रोकने के लिए पहली बार आम लोग बाघों की निगरानी कर रहे हैं। प्रयोग के तौर पर भोपाल सामान्य वन मंडल के मेंडोरा, समरधा, प्रेमपुरा, रातापानी अभयारण्य के झिरी व सीहोर के खारी व आमला में निगरानी हो रही है। स्थानीय लोग बाघों के हर मूवमेंट पर वन विभाग को डाटा उपलब्ध करा रहे हैं। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग दी गई है। भोपाल वन मंडल की 18 बीटों में 36 लोग निगरानी कर रहे हैं। भोपाल वन वृत्त, वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया, तिन्सा फाउंडेशन के शोधकर्ता, रेनमैटर फाउंडेशन के विशेषज्ञ ये तंत्र विकसित कर रहे हैं।

ऐसे हो रही निगरानी

● अभी प्रदेश में 785 बाघों की निगरानी ट्रैप कैमरे, कॉलर आइडी, गश्त से होती है।

● अब बाघ मूवमेंट वाले वन क्षेत्रों के पास ट्रेंड स्वयंसेवकों का नेटवर्क बनेगा। बस्तियों के पास बाघ आए तो चेतावनी मिलेगी ।

● आम निगरानी तंत्र केरवा ई-सर्विलांस सेंटर से शुरू हुई। लोगों को बाघों के व्यवहार, पगमार्क, मल-मूत्र की प्रकृति बताई।

● आम लोगों को डेटा शीट, सुरक्षा बक्से, कैमरा ट्रैप का सेट दिया है।

बाघों की आम निगरानी से मिल रहा डाटा भरोसेमंद और उपयोगी है। डाटा संधारित करने के लिए सॉफ्टवेयर डेवलप कराएंगे।

- आलोक पाठक, डीएफओ, भोपाल

Updated on:
31 Dec 2023, 3:12 PM IST
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