भोपाल

भोपाल में ‘जन्म-मृत्यु’ प्रमाणपत्र के आवेदनों में बड़ी लापरवाही, 75 निजी अस्पतालों पर कार्रवाई

Birth and Death Certificate: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के ऑनलाइन पंजीयन में लापरवाही बरतने पर निगम ने 75 निजी अस्पतालों पर सवा लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
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Oct 20, 2026
जन्म प्रमाण पत्र , प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)
जन्म प्रमाण पत्र , प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- magnific)

Bhopal news: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज बनवाने के लिए नागरिकों को ऑनलाइन आवेदन व्यवस्था की सुविधा दी गई है, लेकिन इस प्रक्रिया में प्राइवेट अस्पतालों द्वारा जमकर लापरवाही बरती जा रही है। ताजा मामला राजधानी में ही टालमटोल, गलत जानकारी दर्ज किया जाने का सामने आया है। जिसमें निगम ने 75 निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए सवा लाख का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई पंजीयन से जुड़े रिकॉर्ड में सटीकता, समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए की गई है।

ऐसे में सवाल यह है कि जब आवेदन दर्ज करने की प्रक्रिया ऑनलाइन है, तो फिर उक्त स्थिति क्यों बन रही है। बता दें कि इसका पंजीयन लोगों के महत्वपूर्ण दस्तावेजों से जुड़ा है, क्योंकि इसका उपयोग स्कूल में प्रवेश, पहचान और विभिन्न सेवाओं में किया जाता है। वहीं मृत्यु प्रमाणपत्र उत्तराधिकार, बैंक खातों, बीमा दावों में जरूरी होता है। ऐसे में रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज होना या देरी आवेदकों की अतिरिक्त परेशानी को बढ़ा रहा है।

अस्पताल की गलती, जल्द हो स्थाई सुधार

प्रमाण- पत्र में दर्ज जानकारी गलत होने पर नागरिकों को सुधार के लिए अस्पताल और संबंधित पंजीयन कार्यालय के बीच चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे समय और मेहनत दोनों खर्च हो रहे हैं। साथ ही मृत्यु प्रमाण-पत्र के मामलों में देरी परिवारों के लिए बैंक, बीमा और संपत्ति संबंधी प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करती है। वहीं, जन्म प्रमाण-पत्र में त्रुटि होने पर बच्चों के शैक्षणिक और पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराने में परेशानी होती है। ऐसे में जरूरी है कि अस्पताल प्रबंधन जन्म-मृत्यु के 21 दिवस के अंदर ही आवेदन की जांच करके ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज कराए, इस दौरान विशेष रूप से सावधानी बरतें। जिससे किसी प्रकार त्रुटि की स्थिति नहीं बने।

जुर्माने के साथ-साथ इसकी निगरानी भी जरूरी

निगम की मुताबिक तो अस्पतालों की ओर से दर्ज की जाने वाली जानकारी में नाम, जन्म या मृत्यु की तारीख और अन्य विवरण की सटीकता महत्वपूर्ण होती है, ऐसे में यदि किसी प्रविष्टि में त्रुटि हो जाती है तो परिजन को सुधार के लिए अतिरिक्त प्रक्रिया अपनानी पड़ती है, अपने जरूरी दस्तावेजों के लिए सुधार के लिए कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने पड़ते हैं। हालांकि जुर्माना केवल कार्रवाई का हिस्सा है, लेकिन इसके स्थायी सुधार के लिए नियमित निगरानी भी जरूरी है।

ऐसे में निगम को अस्पतालों में दर्ज होने वाले आवेदनों की समय-समय पर समीक्षा और लंबित आवेदनों, गलत प्रविष्टियों की पहचान कर सुधार पर फोकस करना चाहिए। जिससे बार-बार लापरवाही सामने आने पर उनके खिलाफ सख्ती हो सके। इसके अलावा अस्पतालों के कर्मचारियों को पंजीयन प्रक्रिया, रिकॉर्ड की शुद्धता के संबंध में प्रशिक्षित कराना जरूरी है। इससे गलतियों की संभावना कम होगी। विशषज्ञों का भी मानना है कि उक्त ऑनलाइन व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब आवेदन समय पर निपटें, रिकॉर्ड में जानकारी सही दर्ज हो।

जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के ऑनलाइन आवेदनों में देरी, गलत जानकारी दर्ज करने की शिकायतों पर कार्रवाई की गई है, नियमों का पालन नहीं करने वाले 75 से अधिक निजी अस्पतालों पर सवा लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। साथ ही सख्त हिदायत भी दी गई है कि पंजीयन संबंधी जानकारी सही, समय पर दर्ज करें, लापरवाही दोहराने पर और सख्ती की जाएगी। - सत्यप्रकाश बड़गैया, प्रभारी रजिस्ट्रार, जन्म-मृत्यु शाखा ननि भोपाल

Updated on:
20 Oct 2026 08:43 am
Published on:
20 Oct 2026 08:43 am