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दिग्विजय सिंह की अयोध्या यात्रा के 3 बड़े सियासी मायने, बुंदेलखंड से राम मंदिर तक क्यों है नजर?

Digvijaya Singh Pad Yatra: पहले नर्मदा परिक्रमा और अब उज्जैन से अयोध्या तक पद यात्रा करने वाले कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की नजर किन मुद्दों पर है...। क्या है उनकी यात्रा के सियासी मायने...।
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भोपाल

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Manish Gite

•

Oct 19, 2026

digvijaya singh

Digvijaya Singh- उज्जैन में प्रेस कांफ्रेस को संबोधित करते दिग्विजय सिंह। (फोटो दिग्विजय सिंह फेसबुक)

Digvijaya Singh Pad Yatra: मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम एवं कांग्रेस नेता आने वाले कुछ दिनों तक सुर्खियों में रहेंगे। वे 20 अक्टूबर से अपनी अयोध्या तक पद यात्रा पर रहेंगे। दिग्विजय सिंह ने अपनी इस यात्रा को 'सत्य सनातन स्वाभिमान' यात्रा नाम दिया है। नर्मदा परिक्रमा कर चुके दिग्विजय सिंह की यह पद यात्रा क्यों अहम है, इसके पीछे धर्मगुरुओं से लेकर राजनीति के जानकार लोग भी कई मायने निकालने में जुटे हैं।

दिग्विजय पहले ही इस यात्रा का रूटमैप जारी कर चुके हैं। दीपावली से पहले 5 नवंबर को प्रथम चरण की पद यात्रा पाटई आश्रम पहुंचेगी। दीपोत्सव के मौके पर पांच दिवसीय अवकाश के बाद फिर यात्रा शुरू करेंगे। खास बात यह है कि दिग्विजय सिंह छोटे-छोटे शहरों में, गांवों में, स्थानीय नागरिकों, धर्मगुरुओं और सामाजिक प्रतिनिधियों से संवाद भी करते चलेंगे।

क्यों अहम है दिग्विजय की यह यात्रा

कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) की यह यात्रा 2017-18 की नर्मदा परिक्रमा की भी याद दिलाती है। जब दिग्विजय सिंह ने पत्नी के साथ 3300 किलोमीटर लंबी पैदल परिक्रमा की थी। तब नर्मदा परिक्रमा के दौरान दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के 110 से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों से गुजरे थे। दिग्विजय सिंह की उस पद यात्रा से कांग्रेस के पक्ष में कितना और कैसा माहौल बना यह 2018 के चुनाव नतीजे देखकर आंकलन किया जा सकता है। राजनीति से जुड़े लोग कहते हैं कि 2018 में कांग्रेस 15 वर्षों बाद सत्ता में आ सकी थी। कम वोट से ही, लेकिन कांग्रेस की सरकार कमलनाथ के नेतृत्व में बनी थी। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि शायद यही कारण रहा है कि राहुल गांधी ने भी दिग्विजय की ही तरह 2022-23 में भारत जोड़ो यात्रा शुरू की थी। इस यात्रा ने कांग्रेस संगठन में उत्साह भरने का काम किया था। खास बात यह है कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकाली गई 4 हजार किमी की इस यात्रा के समन्वयक दिग्विजय सिंह ही थे।

उज्जैन से अयोध्या, क्या है मायने

दिग्विजय सिंह की यह यात्रा उज्जैन से ओरछा होते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी, जो मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड से उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड से गुजरते हुए अयोध्या तक का सफर करेगी। राजनीतिक जानकारों की माने तो कांग्रेस नेता की यह यात्रा दोनों ही राज्यों के बुंदेलखंड और सीमावर्ति इलाकों के धार्मिक और सामाजिक समीकरणों को साधने में अहम भूमिका निभा सकती है। कांग्रेस केन-बेतवा के आंदोलन को भी समर्थन दे रही है। यह यात्रा भी कांग्रेस में ऊर्जा दे सकता है। साथ ही इस यात्रा से सभी का ध्यान हाल ही में हुए चंदा चोरी पर भी जाना स्वाभाविक है। क्योंकि दिग्विजय ने इस यात्रा के उद्देश्य के बारे में यह भी कहा था कि अयोध्या राम मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी मौजूदा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर पीवी नरसिंहाराव के समय गठित रामालय ट्रस्ट को देना चाहिए और उसमें शंकराचार्यों और प्रमुख संतों को शामिल करना चाहिए। दिग्विजय यह भी कह चुके हैं कि उज्जैन के महाकाल मंदिर, अयोध्या के राम मंदिर और ओरछा के रामराजा मंदिर जैसे बड़े धार्मिक स्थलों का वित्तीय लेन-देन जनता के सामने लाना चाहिए। स्वतंत्र ऑडिट भी होना चाहिए। इस यात्रा में यह भी अहम बात है कि अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में आमंत्रण के बावजूद कांग्रेस नेता वहां नहीं गए थे, क्या अब दिग्विजय की इस यात्रा के जरिए कई कांग्रेस नेता अयोध्या पहुंचेंगे?

धर्म गुरुओं का समर्थन मिलने लगा

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के लिए धर्मगुरुओं ने शुभकामना संदेश दिया तो दिग्विजय सिंह ने इन्हें शेयर करते हुए कहा कि शंकराचार्यों के आशीर्वचन और सहयात्रियों के लिए प्रेरणादायी हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कहते हैं कि भगवान श्रीराम की प्रेरणा से धर्म के नाम पर हो रहे कथित अधर्म और मंदिरों में चढ़ावे की चोरी के खिलाफ जनजागरण का संकल्प लिया गया है। धर्म के नाम पर अनाचार, असत्य या छद्म आचरण को सनातन परंपरा का वास्तविक स्वरूप नहीं माना जा सकता। इसी तरह द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने अपने संदेश में कहा है कि नीति का उपयोग धर्म को बल देने के लिए किया जाना चाहिए।

दिग्विजय सिंह उज्जैन पहुंचे

अपनी यात्रा से पहले दिग्विजय सिंह उज्जैन पहुंच गए हैं। दिग्विजय सिंह ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार पर कई सवाल उठाए। खास बात यह है कि इस प्रेस कांफ्रेंस में धर्म सेना प्रमुख और राम मंदिर आंदोलन में 4 गोलियां खाने वाले पूर्व कार सेवक एवं राम मंदिर के चंदे और चढ़ोत्तरी की चोरी से आहत पंडित संतोष दुबे भी थे। इससे पहले एक पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने लिखा है कि यह सनातन धर्म की मर्यादा, सत्य और धर्म की रक्षा के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगी। इसमें नारा गूंजेगा- चंदा चोरों, अयोध्या छोड़ो।