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जिसे दुनिया जलाती है, वही रावण इन परिवारों के घर रोशन करता है

Bhopal Ravan Makers: महंगाई की मार के कारण अब सालभर का राशन का इंतजाम नहीं हो पाता...। दशहरे से ही शुरू हो जाती है इन कलाकारों की दिवाली...।
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भोपाल

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Manish Gite

•

Oct 18, 2026

Bhopal Ravan Makers

Bhopal Ravan Makers- भोपाल के लिंक नंबर 2 पर रावण बनाते कलाकार। (फोटो पत्रिका)

Bhopal Ravan Makers: भोपाल में कई श्रमिक वर्ग हैं जो रोजीरोटी के लिए सीजनेबल कारोबार करते हैं। कोई मौसमी फल बेचता है, तो कोई त्योहारों के मौके पर पूजा-पाठ में लगने वाली सामग्री बेचता है। ऐसे ही कुछ कलाकार भी हैं जो रोजगार के लिए साल में एक बार रावण के पुतला बनाते हैं। बुराई के प्रतीक इस पुतले को वे सम्मान की नजरों से देखते हैं, क्योंकि रावण बनाकर बेचने के बाद कुछ परिवारों की दिवाली अच्छे से मन जाती है।

रावण के पुतले बनाने वाले कलाकार कभी सालभर का राशन देने के दावे करते थे, लेकिन महंगाई की मार के कारण अब उनके दावे धूमिल होते जा रहे हैं। वे खुद ही कहते हैं कि रावण के पुतले बनाकर बेचने के कारोबार में उनकी दिवाली अच्छे से मन जाती है बस। सालभर का राशन का इंतजाम के लिए तो अगले रोजगार पर जाना पड़ता है।

अब दिवाली ही मना पाते हैं

लिंक नंबर दो पर रावण के पुतले बनाने वाले एक कलाकार कहते हैं कि हम लोगों को रावण का पुतला बनाने से सालभर तो नहीं एक-दो माह के राशन का इंतजाम हो जाता है। बस ये कहें कि हमारे पूरे परिवार की दिवाली अच्छे से मन जाती है। अनिल वंशकार भी पिछले 15 सालों से रावण के पुतले बनाने का काम करते हैं। वे बताते हैं कि महंगाई के दौर में अब यह भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि रॉमटेरियल ही महंगा हो गया है। एक रावण में लगने वाले सामान को लाने में भी हम्माली बढ़ गई है। ऐेसे में अब यह सालभर का राशन का इंतजाम कर सके, ऐसा नहीं है। कुछ समय के लिए हमें रोजगार मिल जाता है। अनिल वंशकार बताते हैं कि इनके बड़े भाई भी पहले यही काम करते थे और भोपाल के चक्की चौराहे के साहूजी के ही सभी शिष्य हैं जो रावण मेकिंग का काम कर रहे हैं।

हमारे लिए आज भी सम्माननीय है रावण

यहां के रावण मेकर कहते हैं कि यह पुतला सभी के लिए बुराई का प्रतीक है और इसे लोग जलाते हैं, लेकिन इतनी शिद्दत के साथ हम इसे बनाते हैं और जब लोग खरीदकर ले जाते हैं तो हमें दुख भी होता है। क्योंकि हमें तो इसका मेहताना मिल जाता है, लेकिन हमारी मेहनत को लोग बुराई का प्रतीक मानकर जलाते हैं। हालांकि यह उनकी भावनाएं हैं और यह हमारी भावनाएं हैं। एक रावण हमें कुछ समय के लिए बच्चों और परिवार के लालन-पालन के लिए पैसा दे जाता है।

60 हजार रुपए का एक पुतला

वंशकार बताते हैं कि यहां पर कुछ बच्चे भी रावण बना रहे हैं, जो 200 रुपए से लेकर 15 हजार रुपए तक के पुतले बेचते हैं। 5 फीट से लेकर 25 फीट तक होती है। वहीं हम लोग प्रोफेशनल तरीके से रावण बनाते हैं, जिनके आर्डर मिलते हैं। हम लोग 10 हजार रुपए से लेकर 60 हजार रुपए तक के रावण बनाते हैं। इसमें पटाखे पार्टी को देना पड़ता है। भोपाल शहर के कई क्षेत्रों में हमारे यहां से पुतले ले जाए जाते हैं। भोपाल शहर के चक्की चौराहे के अलावा अन्ना नगर, छोला दशहरा मैदान के पास, बांसखेड़ी, सेकंड नंबर बस स्टॉप समेत एक दर्जन स्थानों पर रावण के पुतले बनाए जा रहे हैं।