
झांकी में भीड़, (Photo Source - Patrika)
Bhopal news: कोलकाता के दुर्गा पंडालों में हुए हादसों के बाद भी मध्यप्रदेश के भोपाल शहर ने कोई सबक नहीं सीखा है। नवरात्र के पावन अवसर पर शहर के दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है। हर तरफ दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी है और संकरे रास्तों से होकर श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी है। भीड़ को नियंत्रित करने का पूरा जिम्मा कुछ वालंटियर्स के भरोसे छोड़ दिया गया है। रोशनी से जगमगाते पंडालों और भव्य झांकियों के आकर्षण के बीच सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम पूरी तरह नदारद है। शहर के अधिकांश झांकी स्थलों पर अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी), पर्याप्त पार्किंग, व्यवस्थित भीड़ प्रबंधन और आपातकालीन निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। संकरे मार्गों पर अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से कभी भी भगदड़ या कोई बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग झांकी, बिठ्ठन मार्केटः यहां जय मां वैष्णो दुर्गा उत्सव समिति द्वारा सजाई गई सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की झांकी और श्रीराम के वनवास के जीवंत प्रसंग देखने के लिए शाम चार बजे से मध्यरात्रि तीन बजे तक पैर रखने की जगह नहीं होती। ये झांकी 1.25 करोड़ में बनी है। यहां पार्किंग के लिए कोई अलग से तय स्थान नहीं है, जिससे मुख्य सड़क पर जाम लगता है। अधिकांश पंडालों में बिजली सुरक्षा (इलेक्ट्रिक एनओसी) काता पता नहीं है।
कोटरा सुल्तानाबादः इस गुफा नुमा झांकी और भूतिया महल के अंदर घना अंधेरा रहता है। एक बार अंदर जाने के बाद बाहर आने में 20 मिनट का रोमांचक समय लगता है, जहां अंदर सांसें थाम देने वाला माहौल है। पूरी तरह से अंधेरे वाले इस इनडोर सेटअप में शॉर्ट सर्किट या भगदड़ की स्थिति में बाहर निकलने के रास्ते बेहद संकीर्ण हैं।
10 नंबर मार्केटः यहां की खास अंधेरी थीम वाली झांकी को देखने के लिए हर रोज हजारों की संख्या में युवा और परिवार पहुंच रहे हैं। सड़कों पर ही पंडाल होने के कारण ट्रैफिक और पैदल यात्रियों का दबाव अत्यधिक है। सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केवल स्थानीय वालंटियर्स के कंधों पर है। पुलिस बल की कमी और फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजामों का सरासर अभाव है।
बरखेड़ा पठानी और विजय मार्केटः मेल प्रसिद्ध भूतिया झांकी में रोजाना 20 से 25 हजार लोग उमड़ रहे हैं। यहां की संकीर्ण सड़कों पर भारी भीड़ के कारण हर पल दमघोंटू स्थिति बन जाती है। पंडालों में आग बुझाने वाले यंत्रों की भारी कमी है। किसी भी अनहोनी की स्थिति में एम्बुलेंस या दमकल के अंदर तक पहुंचने का रास्ता तक नहीं है।
पत्रिका ने रविवार को शहर की प्रमुख झांकियों में जाकर व्यवस्था देखी, तो वहां प्राथमिक सुरक्षा के इंतजाम ही नदारद दिखाई दिए। नवरात्र में डेढ़ हजार से अधिक स्थानों पर पंडाल और झांकियां सजाई गई है। इसमें से 20 फीसदी पंडाल सड़कों के किनारे या आधी सड़क में लगे हुए हैं। ऐसे में जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसके बावजूद, आयोजकों और प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के बजाय पूरी व्यवस्था को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
शॉर्ट सर्किट से भीषण अग्निकांडःबिजली सुरक्षा की एनओसी न होने और ओवरलोडिंग के कारण पंडालों में आग तेजी से फैल सकती है।
भगदड़ः संकरे रास्तों व अंधेरी गुफाओं में ज्यादा भीड़ के बेकाबू होने से कुचलने का खतरा।
दम घुटने की स्थितिः वेंटिलेशन की कमी और अत्यधिक भीड़ से मेडिकल इमरजेंसी।
शहर में नवरात्र, गरबा, दशहरा और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान भीड़, सुरक्षा उपकरण और वाहनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाने की एडवाइजरी जारी की गई है। कोलकाता और हाल ही में न्यू मार्केट में हुई अग्नि दुर्घटना के बाद प्रशासन स्तर पर लोगों से सुरक्षा के उपाय इस्तेमाल में लाने की अपील की जा रही है। त्योहारों के दौरान जन-सुरक्षा के लिए फायर ब्रिगेड अमले की छुट्टियां निरस्त कर उन्हें दिन-रात अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रमुख बाजारों, गरबा स्थलों, रावण दहन मैदानों और विसर्जन घाटों पर फायर वाहन, क्रेन और गोताखोरों की टीम तैनात रहेगी।
पंडाल और गरबा स्थलः पंडालों में अग्निशामक यंत्र और पानी-रेत की बाल्टियां अनिवार्य रूप से रखी जाएं। एंट्री और एग्जिट गेट अलग और चौड़े रखें।
रावण दहनः दहन स्थल से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। बच्चों और बुजुर्गों को पुतलों के पास न जाने दें।
प्रतिमा विसर्जनः विसर्जन केवल चिह्नित घाटों पर ही करें और गहरे पानी में उतरने के बजाय नगर निगम के दल व क्रेन की मदद लें।
यातायात और पार्किंगः बाजारों में गैर-जरूरी वाहन ले जाने से बचें और ट्रैफिक डायवर्जन का पालन करें। रास्तों में गाड़ियां न खड़ी करें ताकि एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड का रास्ता न रुके।
Updated on:
19 Oct 2026 08:48 am
Published on:
19 Oct 2026 08:48 am
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