
Brain Functioning: आज के दौर में स्मार्टफोन और इंटरनेट ने हमारे जीवन को भले ही आसान बना दिया है, लेकिन इसने हमारी याददाश्त को सुस्त कर दिया है। छोटे-छोटे फोन नंबर याद रखना भी अब मुश्किल हो गया है। ऐसे में पढ़ाई करने वाले छात्रों और हर उम्र के लोगों के लिए प्राचीन काल की वे पारंपरिक तकनीकें फिर से चर्चा में आ गई है, जिनका इस्तेमाल सदियों पहले लोग बिना किसी डिजिटल गैजेट के भारी भरकम जानकारी और रास्ते याद रखने के लिए करते थे। ग्रीक 'मेमोरी पैलेस' से लेकर जापान के निन्जा और ऑस्ट्रेलिया की जनजातियों के ये अनोखे नुस्खे आज भी सीखने की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
भोपाल में डॉ. समीक्षा साहू, मनोचिकित्सक बताती है कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को दृश्यों और स्थानों से जोड़ना सीखने की प्रक्रिया को तेज करता है। जब हम अमूर्त जानकारियों को भौतिक स्थानों या शरीर के अंगों से जोड़ते हैं, तो हमारा दिमाग न्यूरल कनेक्शन तेजी से बनाता है, जिससे भूलने की प्रवृत्ति खत्म हो जाती है।
ऑस्ट्रेलिया के आदिवासी लोग प्राचीन काल में हजारों किलोमीटर के रेगिस्तानी रास्तों और जरूरी जानकारियों को कहानियों और गीतों से जोड़कर याद रखते थे। आप भी अपने रोजमर्रा के किसी जाने पहचाने रास्ते, जैसे घर से ऑफिस या स्कूल के मार्ग का उपयोग कर सकते हैं। रास्ते में पड़ने वाली खास जगहों को अपनी पढ़ाई से जोड़ लें, जैसे रास्ते के किसी बड़े पेड़ से इतिहास की कोई तारीख और चौराहे की दुकान से गणित का कोई फॉर्मूला जोड़कर आसानी से याद रखा जा सकता है।
जापानी निन्जा अपनी खुफिया रणनीतियों और जानकारी को याद रखने के लिए शरीर के अलग-अलग अंगों का इस्तेमाल करते थे। वे शरीर के हिस्सों को किसी संख्या, कोड या सूचना का संकेत बना लेते थे और उन्हें क्रम से दोहराकर बिना डायरी के सब कुछ याद रखते थे।
प्राचीन यूनान और रोम के विद्वान लंबी स्पीच याद रखने के लिए मेमोरी पैलेस (लोकस मेथड) का इस्तेमाल करते थे। इसमें किसी जानी-पहचानी जगह, जैसे अपने घर या कमरे की मानसिक कल्पना की जाती है। याद रखने वाली जानकारियों या आंकड़ों को घर के अलग-अलग कोनों, फर्नीचर या कमरों से जोड़ दिया जाता है। जब भी जरूरत होती है, तो मन में उस घर की सैर करते हुए सारी बातें सिलसिलेवार याद आ जाती हैं।
कई जनजातियों में धागे या रस्सी में गांठ लगाकर बातें याद रखने का चलन था। इस तरीके में धागे में क्रमवार गांठें या घुमाव बनाए जाते हैं और हर गांठ को किसी विशेष बात, काम या अध्याय से जोड़ दिया जाता है। बाद में धागे की गांठों को छूते हुए उन बातों को आसानी से दोहराया जा सकता है। आज भी जरूरी टू-डू लिस्ट या पढ़ाई के मुख्य बिंदुओं को याद रखने में मददगार हो सकती है।