Diamond- भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईसर) के वैज्ञानिकों ने हीरा आधारित क्वांटम सेंसिंग तकनीक को टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल-9 (टीआरएल-9) तक पहुंचा दिया
Diamond- एमपी के हीरे विश्व प्रसिद्ध हैं। यहां के पन्ना में गुणवत्तायुक्त प्राकृतिक हीरों की खदान है। अब क्वांटम ग्रेड हीरों के मामले में भी वैज्ञानिकों ने कमाल दिखाया है। भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईसर) के वैज्ञानिकों ने हीरा आधारित क्वांटम सेंसिंग तकनीक को टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल-9 (टीआरएल-9) तक पहुंचा दिया है। इसका मतलब है कि यह तकनीक अब पूरी तरह से उपयोग के लिए तैयार है और प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रही है। खास बात यह है कि क्वांटम सेंसिंग तकनीक से हीरा बहुत सस्ता उपलब्ध होगा। जिन क्रिस्टल और क्वांटम ग्रेड हीरों को विदेशों से करीब 700 से 1000 यूरो (करीब 60 हजार से 90 हजार) में मंगवाया जाता था, अब वही सामग्री देश में ही काफी कम कीमत करीब 2 हजार से 3500 हजार में तैयार की जा सकती है। आईसर वैज्ञानिकों के इस सफल प्रयोग से शोध और उद्योग जगत को बड़ी राहत मिलेगी।
आभूषणों में आमतौर पर जेम ग्रेड डायमंड इस्तेमाल होते हैं जबकि क्वांटम ग्रेड डायमंड का उपयोग अत्याधुनिक तकनीकों में किया जाता है। ये डायमंड क्वांटम कंप्यूटर, सुपर-सेंसिटिव सेंसर और सुरक्षित संचार प्रणाली बनाने में काम आते हैं।
कैसे मिली यह सफलता
वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रयोगशालाओं में अत्याधुनिक सीवीडी रिएक्टर और कॉन्फोकल माइक्रोस्कोप जैसे उपकरणों की मदद से उच्च गुणवत्ता वाले क्वांटम ग्रेड डायमंड तैयार किए गए। वैज्ञानिकों ने 2डी क्वांटम मटेरियल्स और विशेष क्रिस्टल विकसित कर उन्हें सफलतापूर्वक परीक्षण के बाद टीआरएल -9 स्तर तक पहुंचाया।
आईसर के वैज्ञानिकों ने बताया कि क्वांटम ग्रेड डायमंड एक सुपर-सेंसिटिव वैज्ञानिक हीरा है। यह वहां काम आता है जहां सामान्य मशीनें काम नहीं कर पातीं। इसके बिना भविष्य की कई हाई-टेक तकनीकें अधूरी रह सकती हैं।
2027 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का नेतृत्व डॉ. फानी कुमार, डॉ. अर्नब खान, डॉ. शांतनु तालुकदार और डॉ. चंदन सामंता सहित आईसर के कई संकाय सदस्य कर रहे हैं। डॉ. शांतनु ने बताया कि यह प्रोजेक्ट पांच साल के लिए स्वीकृत हुआ है और वर्ष 2027 तक इसका काम पूरा कर लिया जाएगा।
1-यह बहुत हल्के चुंबकीय क्षेत्र, तापमान, दबाव या बिजली के संकेतों को भी पकड़ सकता है। जैसे दिमाग की सूक्ष्म गतिविधियों को मापना, हार्ट सिग्नल्स को बेहतर तरीके से रिकॉर्ड करना।
-क्वांटम कंप्यूटिंग में यह क्वांटम बिट के रूप में काम कर सकता है, जिससे भविष्य के तेज और शक्तिशाली कंप्यूटर बनते हैं।
-रक्षा और साइबर सुरक्षा में हैकिंग से सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन के लिए उपयोगी।
क्वांटम ग्रेड हीरोें के अभाव में आएंगी ये दिक्कत
-बहुत सूक्ष्म माप लेना कठिन हो जाएगा।
-ब्रेन रिसर्च, मेडिकल डायग्नोसिस और डिफेंस टेक्नोलॉजी की सटीकता कम हो सकती है।
-क्वांटम कंप्यूटर और सुरक्षित संचार तकनीक का विकास धीमा पड़ेगा।
-विदेशों पर निर्भरता बढ़ेगी और लागत ज्यादा होगी।