
भोपाल। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग भूमि विवाद के कारण अटकी पड़ी ग्रामीण सड़कों को आगे नहीं बनाएगा। विभाग ने तय किया है कि प्रदेश में 2018-19 से पहले की जितनी भी सुदूर संपर्क सड़के भूमि विवाद के कारण अधूरी बनी हुई है उन्हें वहीं पर रोक कर पूर्ण मान लिया जाए। केन्द्र सरकार की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने यह रास्ता निकाला है।
दरअसल, सड़क बनने के प्रमाण देने के बाद ही केन्द्र सरकार अगली किस्त का पैसा देती है। प्रदेश में सौ से ज्यादा ऐसी सुदूर सड़के हैं जिनका निर्माण कार्य तो चार-पांच साल पहले शुरू हुआ था लेकिन वे भूमि विवाद के कारण बीच में ही रोकना पड़ गई। इनका उपयोगिता प्रमाण-पत्र न दिए जाने के कारण केन्द्र सरकार ने पैसा रोक लिया। पंचायत ग्रामीण विकास विभाग ने पिछले साल मंजूर की गई सुदूर सड़कों को दिसंबर में पूरा करने के निर्देश भी दिए हैं।
छोटे गांवों को जोडऩे के लिए सुदूर सड़क का प्रयोग-
गांवों को जोडऩे के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़के बनाई जाती हैं। लेकिन इसमें पांच सौ से अधिक जनसंख्या वाले गांवों को ही शामिल किया गया। ऐसे में छोटे मजरे-टोले और गांव के भीतर बस्तियों के पहुंच मार्ग बच रहे थे।
ऐसे में प्रदेश सरकार ने सुदूर संपर्क सड़क योजना को मंजूरी दी। लेकिन सड़क मंजूरी के बाद सामने आया कि बस्तियों और मजरे टोलों को जोडऩे में बीच में लोगों की निजी भूमि आड़े आ रही थी। सड़क मंजूर करने से पहले उसकी सही योजना नहीं बनने के कारण भी ये मामले सामने आए।