शहर के 35 ऑपरेटरों ने लगाए थे प्रकरण, 25 प्रकरणों में मिला परमिट
भोपाल. नादरा बस स्टैंड और शहर के अन्य स्थानों से आसपास के जिलों तक बसें चलाने वाले निजी ऑपरेटरों पर शासन ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। परिवहन कार्यालय में अस्थाई परमिट मांगने वाले ऑपरेटरों को मुनाफाखोरी नहीं करने की शर्त और नियमों के पालन के शपथ पत्र भरवाकर अस्थाई परमिट जारी करने का निर्णय लिया है। अस्थाई परमिट मामलों की सुनवाई के दौरान विभाग को स्थानीय ऑपरेटरों के कुल 35 आवेदन प्राप्त हुए थे। शासन से दस्तावेजों की जांच के बाद संभागीय परिवहन कार्यालय से इन पर अंतिम सुनवाई की गई। इन प्रकरणों की सुनवाई के दौरान संतोषजनक दस्तावेज नहीं पाए जाने पर 10 आवेदनों को खारिज कर दिया गया। जबकि 25 ऑपरेटरों से शपथ पत्र सहित अन्य दस्तावेज जमा करवाकर अस्थाई परमिट जारी किए गए। जिन रूट के लिए अस्थाई परमिट जारी किए गए हैं उनमें मुख्य रूप से विदिशा, रायसेन, सागर, देवास, नसरुल्लागंज, शाहगंज, ब्यावरा, नरसिंहपुर, इटारसी, सोहागपुर, पिपरिया शामिल हैं।
नया कानून आने के बाद बदलेंगे जुर्माना
अस्थाई परमिट अदालत में प्रकरणों की सुनवाई के दौरान सभी बस ऑपरेटों को विभागीय नियमों से अवगत कराया गया। ऑपरेटरों को साफ किया गया है अस्थाई परमिट देने का आशय ही ये है कि यदि अनियमित तरीके से व्यवसाय का संचालन पाया जाए तो इसे निरस्त किया जा सके। बस ऑपरेटरों को बताया गया कि प्रदेश में नया परिवहन कानून लागू करने की तारीख तय नहीं हुई है लेकिन इसके तहत ओवरलोडिंग करने पर छह माह का कारावास और पांच लाख रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है।
अस्थाई परमिट के लिए जिले से 35 नए आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 10 प्रकरणों को सुनवाई के बाद निरस्त किया, शेष को अस्थाई अनुमति दी गई।
संजय तिवारी, आरटीओ