Kailash Vijayvargiya- मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कैबिनेट बैठक में शामिल हुए मंत्रियों की जारी की गई तस्वीर में भी नजर नहीं आए
Kailash Vijayvargiya - मध्यप्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेता और राज्य सरकार के संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय की नाराजगी बरकरार है। मंगलवार को यह बात फिर सामने आई। कैबिनेट की बैठक हुई जिसमें अहम निर्णय लिए गए। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कैबिनेट ब्रीफिंग से दूरी बनाए रखी। कैबिनेट बैठक के फैसलों की जानकारी प्रदेश के एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने दी। इतना ही नहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कैबिनेट बैठक में शामिल हुए मंत्रियों की जारी की गई तस्वीर में भी नजर नहीं आए। अहम बैठक में अनुपस्थिति को उनके मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा हैं।
प्रदेश के वरिष्ठ बीजेपी नेता और संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय मंगलवार को तब फिर चर्चा में आ गए, जब बैठक की फोटो जारी की गई। इसमें सरकार के लगभग सभी मंत्री थे लेकिन उनके साथ मंत्री विजयवर्गीय नहीं थे। इससे सहज अंदाजा लगा कि वे प्रत्यक्ष रूप से बैठक में भी नहीं थे। जबकि आधे घंटे बाद सिंहस्थ के लिए गठित मंत्री मंडलीय समिति की बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय शामिल हुए। अहम बैठक में उनकी अनुपस्थिति और दूसरे में उपस्थिति कहीं न कहीं मतभेद स्पष्ट करती हैं।
हालांकि सत्ता- संगठन इसे सामान्य बता रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक पिछली कैबिनेट में एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से कैबिनेट बैठक की ब्रीफिंग का अनुरोध किया। लेकिन बाद में मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने ब्रीफिंग की। इस घटना को मंत्री विजयवर्गीय की अघोषित असहमति से जोड़कर देखा जा रहा है।
बता दें, 19 जनवरी को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अचानक अवकाश पर चले गए थे। इस दौरान इंदौर के ही भागीरथपुरा में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला जारी रहा। गणतंत्र दिवस में ध्वजारोहण कार्यक्रम में भी उनका नाम प्रभारियों की सूची में नहीं आया। छुट्टियों से लौटने के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कैबिनेट की बैठकों में शामिल नहीं हुए। कुछ मौकों पर उन्होंने वर्चुअली मीटिंग अटेंड की।
प्रदेश के एमएसएमई मंत्री चैतन्य काश्यप ने कैबिनेट बैठक के फैसलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गेहूं खरीदी के बाद अब किसानों से समर्थन मूल्य पर चना व मसूर भी खरीदा जाएगा। कैबिनेट बैठक में मंगलवार को सरकार ने खरीदी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अगले 3 वर्षों तक खरीदी की जाएगी। निर्णय को उन किसानों के भरोसे को बढ़ाने वाला बड़ा निर्णय बताया जा रहा है जो हर साल चना-मसूर की खेती करते हैं और खुले बाजार में अच्छे दाम नहीं मिलने से परेशान होते हैं। सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लक्ष्य को पाने के लिए मंदसौर की कातना सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को भी हरी झंडी दे दी है। इस पर 88.41 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इससे मंदसौर की भानपुरा तहसील के 12 गांवों के 3500 हेक्टेयर में सिंचाई होगी।
चना-मसूर खरीदने 3174 करोड़ मिले
अगले तीन वर्षों तक चना व मसूर खरीदने के लिए 3 हजार 174 करोड़ रुपए मिले है। इसमें 2026-27 के लिए 1,058 करोड़, 2027-28 के लिए 1,058 और 2028-29 के लिए 1,058 करोड़ अग्रिम राशि विपणन संघ को उपलब्ध कराई जाएगी। यह खरीदी राज्य सहकारी विपणन संघ भोपाल करेगा। चना के कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत और मसूर का 100 प्रतिशत खरीदा जाएगा। खरीदी प्रक्रिया के दौरान मंडी शुल्क में छूट रहेगी।
पीएमश्री स्कूल: प्रदेश के पीएमश्री स्कूलों का 940 करोड़ से विस्तार किया जाएगा। राशि से शिक्षा में सुधारात्मक काम होंगे, डिजिटल लर्निंग का विस्तार किया जाएगा।
योजनाओं का विस्तार: नगरीय अधोसंरचना विकास पर 1,317.62 करोड़ खर्च होंगे। कार्यालय भवनों के निर्माण के लिए 120.98 करोड़, स्टा्प 806 करोड़ व जिला मुख्यालयों में भवन के लिए 1,428 करोड़ की स्वीकृति दी गई। ये योजनाएं 2031 तक जारी रहेंगी।
बिगड़े वनों का सुधार: सरकार ने कम घनत्व व संकटग्रस्त सामान्य वन क्षेत्रों को पौधे लगाकर हरियाली बढ़ाने व संरक्षण से जुड़े कामों पर 5215 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है। यह राशि अगले 5 वर्षों में खर्च किए जाएगी।
गरीब बच्चों की पढ़ाई: गरीब बच्चों को पढ़ाने वाले निजी स्कूलों को 5 वर्षों के लिए 3039 करोड़ रुपए, वहीं सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को 693 करोड़ की पुस्तकें समेत अन्य पाठ्य सामग्री बांटी जाएंगी। ये सामग्रियां कक्षा 9-12वीं तक छात्र-छात्राओं को मिलती है।