
AIIMS Bhopal: एम्स भोपाल के डॉक्टरों ने 52 वर्षीय मरीज के दो अलग-अलग कैंसर का एक ही ऑपरेशन में सफल उपचार किया। मरीज लगातार बढ़ते पीलिया, पूरे शरीर में खुजली और तेजी से वजन घटने की शिकायत लेकर एम्स आया था। जांच में पता चला कि कैंसर के कारण पित्त नली जाम हो गई है और दाहिनी किडनी में 6.5 सेंटीमीटर का कैंसर ट्यूमर भी है।
मरीज की स्थिति को देखते हुए यूरोलॉजी और सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने संयुक्त सर्जरी की योजना बनाई। सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी टीम ने व्हिपल प्रक्रिया के जरिए पित्त नली और आसपास के कैंसरग्रस्त हिस्से को हटाया। यूरोलॉजी टीम ने राइट रेडिकल नेफ्रेक्टॉमी कर कैसरग्रस्त दाहिनी किडनी को निकाल दिया।
सर्जरी का नेतृत्व यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. देवाशीष कौशल और सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विशाल गुप्ता ने किया। टीम में डॉ.अभिषेक चौबे, डॉ. प्रसून झा, डॉ. आदित्य सूद, डॉ. प्रवेश माथुर, डॉ. श्रीराम और डॉ. बेसिल शामिल रहे। डॉ. वैशाली वैन्डेस्कर और डॉ. आशुतोष कौशल भी टीम में थे। यूरोलॉजी विभाग हर महीने औसतन 6 से 7 किडनी कैंसर मरीजों की सर्जरी करता है। पिछले एक वर्ष में 75 किडनी कैंसर का सफल उपचार किया जा चुका है। सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी लीवर, अग्न्याशय, पित्ताशय और पित्त नलियों से जुड़े जटिल कैंसरों का उपचार करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कैंसर की शुरुआती पहचान होने पर उपचार की सफलता कई गुना बढ़ जाती है। धूम्रपान करने वाले, मोटापे से ग्रस्त, उच्च रक्तचाप या पुरानी किडनी बीमारी से पीड़ित लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। जोखिम वाले लोगों में समय-समय पर अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचें कैंसर को शुरुआती अवस्था में पकड़ने में मदद कर सकती हैं।
एम्स भोपाल के विशेषज्ञों ने बताया कि संस्थान में जठरांत्र और मूत्र संबंधी कैंसर के लिए उन्नत इलाज उपलब्ध है। पिछले एक साल में करीब 75 किडनी कैंसर मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि पीलिया, पेशाब में खून, लगातार बुखार, अचानक वजन घटना और भूख कम लगना जैसे लक्षणों को हल्के में न लें। समय पर जांच से कैंसर का इलाज संभव है।