MP News : बदलते वक्त के साथ सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न सामाजिक संगठन भी डिजिटलीकरण की राह पर है। आधुनिक सोच के साथ राजधानी भोपाल के विभिन्न समाजों के ऑनलाइन प्लेटफार्म तैयार हैं। युवाओं को इससे जोड़ा जा रहा है।
MP News : बदलते वक्त के साथ सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न सामाजिक संगठन भी डिजिटलीकरण की राह पर है। आधुनिक सोच के साथ राजधानी भोपाल के विभिन्न समाजों के ऑनलाइन प्लेटफार्म तैयार हैं। युवाओं को इससे जोड़ा जा रहा है। इस सामाजिक, सांस्कृतिक नवाचार का उद्देश्य भावी पीढ़ी को समाज, संस्कृति, परंपराओं से जोडऩा है। दूसरी ओर कई समाजों की ओर से समाज के इतिहास, समाज के आराध्य और परंपराओं को लेकर भी डिजिटल डायरेक्टरी तैयार की जा रही है, ताकि समाज के युवा वर्ग अपने इतिहास को जाने। इसका मुख्य उद्देश्य समाज की परंपराओं से युवाओं को जोड़ना हैं। जिससे वे समाज की गतिविधियों से जागरुक हो सके।
इसको लेकर गुजराती समाज के अध्यक्ष संजय पटेल ने बताया कि वाट्सऐप पर डिजिटल कार्ड बनाकर समाज के आमंत्रण सहित जरूरी जानकारी शेयर की जा रही है। ताकि खर्च और कागज बचे। इसी तरह राठौर क्षत्रिय समाज के महामंत्री रमेश राठौर का कहना है कि समाज के आमंत्रण पत्र की जगह डिजिटल कार्ड का उपयोग हो रहा है। ऑनलाइन प्लेटफार्म भी बन रहा है। जीवन की व्यस्तताओं को देखते हुए ऐसे पहल की जा रही हैं।
सार्वदेशिक कायस्थ युवा प्रतिनिधि संस्था ने वेबपोर्टल लांच किया है। जिसमें बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अलग-अलग सेवाएं उपलब्ध हैं। इसमें परिवार कार्ड, वैवाहिक जानकारी, रोजगार, और फैमिली ट्री जैसे कई फीचर्स हैं। फैमिली ट्री में किसी भी परिवार के वंशावली की जानकारी है। युवाओं के रोजगार की जानकारी है। संस्था के वेदआशीष श्रीवास्तव ने बताया कि इसका उद्देश्य समाज को डिजिटल प्लेटफार्म से जोडऩा है।
सिंधी समाज भी ऑनलाइन प्लेटफार्म तैयार कर रहा है। सिंधु भवन ट्रस्ट के ऐप और ही वेबसाइट की लांचिंग इसी माह होगी। ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेंद्र मनवानी ने बताया कि अपनी संस्कृति, भाषा, परंपराओं से समाज के युवा जुड़े इसके लिए इसे तैयार किया जा रहा है। यूथ विंग से जुडऩे के लिए क्यूआरकोड दिया जाता है। साथ ही आमंत्रण का क्यूआरकोड भी बनाते हैं, जिसे स्कैन करते ही जानकारी सदस्य तक पहुंच जाती है। अब तक 3 हजार से अधिक युवा जुड़ चुक हैं।
श्यामला हिल्स के मानस भवन में पं. रामकिंकर उपाध्याय और पुस्तकालय में धार्मिक ग्रंथ सहित 16 हजार किताबे हैं। पुस्तकालय और शोध केंद्र के निदेशक महेश दुबे ने बताया कि शीघ्र ही इन ग्रंथों को डिजिटल किया जाएगा, साथ ही ई लाइब्रेरी भी तैयार की जाएगी। इसके लिए भवन के ऊपरी हिस्से में काम किया जा रहा है, जहां स्टडी हॉल आदि बनाए जाएंगे। अधिक से अधिक युवा जुड़े इसके लिए इसे डिजिटल किया जा रहा है।