रिटायरमेंट की कगार पर पहुंचे इंस्पेक्टर सरकारी प्रक्रिया की सुस्त चाल
भोपाल : बिना प्रमोशन दिए सरकार ने पुलिस के खाली पद भरने का तरीका निकाला और कानून में संशोधन कर उच्च पद का प्रभार देने का रास्ता साफ कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया में सरकार ने छह महीने लगा दिए। हेड कांस्टेबल, एएसआई और सब इंस्पेक्टर को तो नियमानुसार उच्च पद का प्रभार जल्द दे दिया लेकिन टीआई को डीएसपी बनाने में देरी हो गई। इस देरी के चलते कई इंस्पेक्टर रिटायरमेंट की कगार पर पहुंच गए। डीएसपी बनने वाले 150 इंस्पेक्टरों की सूची को मंजूरी देने में ही गृह विभाग ने डेढ़ महीने से ज्यादा का वक्त लगा दिया। 12 जुलाई को जब सूची जारी हुई तो उसमें शामिल दो इंस्पेक्टर रिटायर हो गए।
इस तरह चली प्रक्रिया :
सुप्रीम कोर्ट में प्रमोशन का मामला लंबित होने से सरकार ने साल की शुरुवात में पुलिस में खाली पदों को भरने के लिए उच्चपद का प्रभार देने का फैसला किया। सरकार की मंशा थी कि 31 मार्च तक सभी योग्य पुलिसकर्मियों को उच्च पद का प्रभार दे दिया जाए। 9 फरवरी को गृह विभाग ने पुलिस रेग्युलेशन के पैरा 72 में संशोधन कर राजपत्र में प्रकाशित किया। इस नियम के तहत कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक के उच्च प्रभार दिए जा सकता था। इसमें राजपत्रित अधिकारी का उच्च प्रभार शामिल नहीं था। 31 मार्च को पुलिस रेग्युलेशन एक्ट 45 के तहत 38 इंस्पेक्टरों को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए डीएसपी का पद दिया गया। 3 मई को धारा 45 क जोड़ी गई, जिसका प्रकाशन राजपत्र में हुआ। पुलिस रेग्युलेशन में इस संशोधन के बाद टीआई को डीएसपी के पद का प्रभार देने का रास्ता साफ हुआ। 12 जुलाई को 150 टीआई की सूची जारी हुई जिसमें 150 इंस्पेक्टर्स को डीएसपी के उच्चपद का प्रभार दिया गया।
उच्च प्रभार के लिए इतने पद :
- कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल - 8250
- हेड कांस्टेबल से एएसआई - 5175
- एएसआई से एसआई - 1335
- एसआई से इंस्पेक्टर - 800
- टीआई से डीएसपी - 160
पुलिस में इतने पद हैं खाली :
- भारतीय पुलिस सेवा - 47
- अतिरक्त पुलिस अधीक्षक - 8
- उप पुलिस अधीक्षक - 249
- रक्षित निरीक्षक - 170
- निरीक्षक - 968
- सूबेदार - 1032
- उप निरीक्षक - 1369
- सहायक उपनिरीक्षक - 4850
- प्रधान आरक्षक - 7189
- आरक्षक - 4209
- एफएसएल - 243
- अनुविभागीय बल - 976