भोपाल

भोपाल में हैं वाट्सअप वाले हनुमानजी, मैसेज करने वालों की पूरी कर देते हैं मनोकामना

hanuman ji ka whatsapp number: भोपाल के नेहरू नगर में है अर्जीवाले हनुमानजी, यहां वाट्सअप पर भी भेजी जाती है अपनी मनोकामना…।
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Updated: 1 Apr 2026, 7:03 PM IST
hanuman mandir bhopal
भोपाल के नेहरू नगर के हनुमान मंदिर में वाट्सअप पर भी अर्जी लगाते हैं लोग। पंडित नरेंद्र दीक्षित वो संदेश हनुमानजी के सामने पढ़कर सुनाते हैं। - (फोटो पत्रिका)

Hanuman Jayanti: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में हनुमानजी का अनोखा मंदिर है। कई वर्षों पहले इस मंदिर में कागजों में अर्जी लिखी जाती थी और नारियल के साथ बांधकर हनुमानजी के चरणों में रख दी जाती थी। लेकिन समय के साथ सबकुछ हाईटेक होता गया। अब कागज की अर्जी ने मोबाइल में अपनी जगह बना ली। कई भक्त ऐसे हैं जो मंदिर नहीं जा पाते तो उन्होंने मोबाइल को अपना सहारा बना लिया। पहले तो फोन से आने वाली अर्जी को पंडितजी हनुमानजी के कान में लगा देते थे। अब लोग वाट्सअप पर अपनी परेशानी लिखकर हनुमानजी के वाट्सअप नंबर पर भेज देते हैं। भक्तों की आस्था ही है कि उनकी मनोकामना भी पूरी हो जाती है।

यह अनोखा मंदिर भोपाल के नेहरू नगर में अर्जीवाले हनुमान मंदिर के साथ ही 'वाट्सअप वाले हनुमानजी' के नाम से चर्चित हो गया है। इस मंदिर में स्टूडेंट्स ज्यादा अर्जी लगाते हैं। मोबाइल के जमाने में चिट्ठी-पत्री को एक तरफ कर यह स्टूडेंट्स वाट्सअप पर ही अर्जी भेज देते हैं। यहां के प्रमुख पुजारी पंडित नरेंद्र दीक्षित इनकी मनोकामना मंत्रोच्चार के साथ हनुमानजी के सामने पढ़कर सुना देते हैं।

सोशल मीडिया का है जमाना

hanuman ji ka mobile: मंदिर के पुजारी पंडित नरेंद्र दीक्षित (pandit narendra dixit) बताते हैं कि पहले चिट्ठी और पत्रों के जरिए एक नारियल के साथ अर्जी लगाई जाती थी, लेकिन बदलते दौर में और दूर-दराज रहने वाले लोग मोबाइल के जरिए मनोकामना सुनाने लगे और वाट्सअप पर भी लिखकर भेजने लगे। दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए पंडितजी ने हनुमानजी के लिए एक अलग ही वाट्सअप नंबर उपलब्ध कराया है। इसी नंबर पर लोग समस्या बताते हैं और वाट्सअप के जरिए अर्जी भेज देते हैं। पंडितजी उनका यह संदेश हनुमानजी की मूर्ति तक मंत्रोच्चार के साथ पहुंचा देते हैं। हनुमानजी के लिए 7000335328 नंबर पर वाट्सअप करते हैं।

पंडित दीक्षित बताते हैं कि स्थानीय लोगों के अलावा बेंगलूरु, पुणे, मुंबई तो कोई दिल्ली, हिमाचल, पंजाब चले गए लोग आज भी वाट्सअप पर अपनी अर्जी भेज देते हैं। यह उनकी भावनाएं हैं कि वे किसी न किसी तरह से भगवान के साथ जुड़े रहना चाहते हैं।

वाट्सअप पर आई थी पहली अर्जी

पंडित नरेंद्र दीक्षित कहते हैं कि पांच-छह साल पहले राहुल गुप्ता नामक एक युवक ने वाट्सअप के जरिए पहली बार अर्जी लगाई थी। पहले वे खुद हैरान रह गए, लेकिन बच्चे की आस्था के आगे उन्होंने भी अर्जी को आगे बढ़ा दिया। उसकी अर्जी भगवान के समक्ष पढ़कर सुना दी। फिर क्या था, बच्चे की मनोकामना पूरी होने के बाद यह सिलसिला ही शुरू हो गया।

पं. दीक्षित के मुताबिक ऐसे किस्से भी आए जब कोई भक्त अस्पताल में भर्ती हुआ तो उनके परिजनों ने यहां के मंदिर का पूजन और आरती वीडियो कॉल के जरिए दिखाई गई। दर्शन कराए गए तो उन्हें स्वास्थ्य लाभ होने लगा।

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1 Apr 2026, 7:03 PM IST
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