
MP news:मध्यप्रदेश में अब शस्त्र और कारतूसों की खरीद-बिक्री पर ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था की जा रही। मप्र राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम के माध्यम से नया पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिसमें यह सारा रिकॉर्ड दर्ज होगा। अभी भारत सरकार के नेशनल डेटाबेस ऑफ आर्ट्स लाइसेंस (एनडीएएल) पोर्टल पर शस्त्र लाइसेंस जारी करने और उनके पंजीयन की व्यवस्था है, लेकिन शस्त्र और कारतूसों की खरीद-बिक्री की निगरानी के प्रावधान नहीं हैं। प्रदेश में नया पोर्टल तैयार होने के बाद इसे केंद्रीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा।
यह निर्णय हाल ही में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में लिया गया। नई व्यवस्था लागू होने पर शस्त्र विक्रेताओं को हर खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज करना होगा। इससे यह पता चल सकेगा कि किस लाइसेंसधारक ने कब, कहां से और कितने कारतूस खरीदे। कारतूसों की खरीद और उनके उपयोग से संबंधित जानकारी के रिकॉर्ड को भी निगरानी व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी है। इससे शस्त्र और कारतूसों के लेन-देन का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखने में मदद मिलेगी।
वर्तमान व्यवस्था में शस्त्र लाइसेंस का रिकॉर्ड तो ऑनलाइन उपलब्ध है, लेकिन लाइसेंसधारक द्वारा खरीदे गए कारतूसों का पूरा ब्योरा एकीकृत निगरानी प्रणाली में दर्ज करने की व्यवस्था नहीं है। नया पोर्टल बनने के बाद शस्त्र विक्रेताओं को प्रत्येक बिक्री का विवरण दर्ज करना होगा। वहीं, लाइसेंसधारकों के लिए भी खरीदे गए कारतूसों और उनके उपयोग का हिसाब रखना अधिक महत्वपूर्ण होगा। इससे जरूरत पड़ने पर खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा सकेगी।
फिलहाल, शूटिंग में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को जारी शस्त्रों और कारतूसों के उपयोग के निगरानी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इससे नए आवेदनों की जांच सख्त करने का निर्णय लिया गया है। आवेदनों पर कार्रवाई से पहले स्टेट राइफल एसोसिएशन अथवा नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया से संबंधित खिलाड़ी का सत्यापन कराया जाएगा।
मध्यप्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के नवीनीकरण में प्रक्रियागत समस्याएं भी हैं। एनडीएएल पोर्टल पर आवेदनों का निराकरण दर्ज नहीं होने के कारण 2.40 लाख शस्त्र लाइसेंसों की वैधता समाप्त हो गई है। समस्या के समाधान के लिए तय किया है कि नवीनीकरण सहित अन्य ऑनलाइन आवेदनों का पहले एनडीएएल पोर्टल पर निराकरण किया जाएगा। इसके बाद लोकसेवा पोर्टल से संबंधित सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।
शस्त्र लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था होने के बावजूद ऑफलाइन आवेदन लिए जा रहे थे। इन कार्यालयों से लाइसेंस संबंधी प्रस्ताव गृह विभाग को भौतिक रूप से भेजे जा रहे थे। समीक्षा में इसे निर्धारित ऑनलाइन प्रक्रिया के अनुरूप नहीं पाया गया। तय किया गया कि 1 नवंबर से शस्त्र लाइसेंस संबंधी आवेदन केवल एनडीएएल पोर्टल के माध्यम से लिए जाएंगे। जिला दंडाधिकारी कार्यालयों में ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने और प्रस्तावों को भौतिक रूप से गृह विभाग भेजने की व्यवस्था समाप्त की जाएगी। निर्देशों का पालन नहीं करने वाले कार्यालयों को चेतावनी भी दी गई है।