
भोपाल. राजधानी भोपाल देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल था, जहां आने वाला व्यक्ति हरियाली देखकर यहीं बस जाना चाहता था, लेकिन एक दशक में शहर से हरियाली खत्म हुई है। वर्ष 2009 से 2019 के बीच राजधानी के नौ हरियाली संपन्न क्षेत्रों की 225 एकड़ जमीन से 95 हजार 800 से अधिक पेड़ काट दिए गए। इसमें अन्य जगहों पर पेड़ों की कटाई शामिल की जाए तो ये आंकड़ा तीन लाख से अधिक तक पहुंच जाता है।
यह खुलासा ‘जनता की लैब’ की ओर से किए गए विस्तृत शोध में हुआ है। हालात यह हैं कि राजधानी में 1995 में 65 फीसदी हरियाली थी, जो घटकर महज नौ फीसदी रह गई है। शोध के अनुसार यदि इसी तरह पेड़ कटते रहे तो छह साल बाद वर्ष 2025 में शहर में मात्र तीन फीसदी हरियाली ही बचेगी। अंतररराष्ट्रीय संस्था जीसीड (ग्लोबल अर्थ सोसाइटी फॉर एनवॉयरमेंटल एनर्जी एंड डवलपमेंट) द्वारा स्थापित जनता की लैब ने मंगलवार को शोध-पत्र जारी कर भोपाल की भयावह हो रही स्थिति का खुलासा किया है।
डिसेडल डिफारेस्टशन ऑफ भोपाल सिटी 2009-2019 के नाम से जारी शोध के बारे में संस्था प्रमुख डॉ. सुभाष सी. पांडेय ने बताया कि शहर के 13 प्रमुख हरित क्षेत्रों में वर्ष 2009 और 2019 की स्थिति का अध्ययन किया गया। शोध के लिए टीवी रामचन्द्रन की रिपोर्ट, स्टेटिकल डाटा, साइट विजिट, और गूगल इमेज का इस्तेमाल किया गया।
बेतरतीब विकास की भेंट चढ़े पेड़-पौधे
हबीबगंज स्टेशन से खत्म हुआ हरित क्षेत्र
हबीबगंज स्टेशन के प्लेटफार्म एक की ओर रेलवे ट्रिब्यूनल ऑफिस से फूड प्लाजा के बीच 7 एकड़ में 10 साल में 95% हरियाली खत्म हुई है। मंदिर से ओवरब्रिज तक 10 एकड़ में 99त्न हरित क्षेत्र खत्म हुआ है।
ग्रीन बिल्डिंग की भेंट चढ़ गए सैकड़ों पेड़
लिंक रोड दो पर वन विभाग मुख्यालय की बिल्डिंग बनाकर इसके ग्रीन बिल्डिंग होने का दावा किया जा रहा है। इस बिल्डिंग से 12 एकड़ में 95 फीसदी हरियाली खत्म हो गई है।
न्यू मार्केट का स्मार्ट सिटी एरिया
न्यू मार्केट के पास तुलसी नगर में 30 एकड़ के क्षेत्र में हरियाली 95 फीसदी तो इसी क्षेत्र के दूसरे 60 एकड़ के इलाके में हरियाली 55 फीसदी खत्म हुई है।
बुलेवार्ड स्ट्रीट में 100% कटाई
साउथ टीटी नगर में स्टेडियम के पास से गुजर रही बुलेवार्ड स्ट्रीट के 18 एकड़ के इलाके में हरियाली 100 फीसदी खत्म हो गई। यहां सडक़ के लिए पेड़ काटे गए हैं।
शोध के प्रमुख बिंदु
हकीकत बताते आंकड़े
पर्यावरणविद् टीवी रामचन्द्रन की रिपोर्ट के अनुसार 1992 में 66 फीसदी हरियाली थी, जो 2009 में 35त्न बची थी। जनता की लैब की रिपोर्ट के अनुसार अब इसमें से भी 9% हरियाली बची है। 2009 की कुल हरियाली का मात्र 25 फीसदी।