
(पत्रिका ब्यूरो,भुवनेश्वर): लक्ष्मणानंद सरस्वती की सन 2008 को जन्माष्टमी वाले दिन हत्या कर दी गयी थी। उनकी पुण्य तिथि के दिन सांप्रदायिक हिंसा की पुनरावृत्ति रोकने के लिहाज कंधमाल जिले में भारी सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने धर्म परिवर्तन करके इसाई बने लोगों को फिर से हिंदू धर्म में वापस लाने के लिए अभियान चला रखा था। दो सितंबर को जिले में उनकी पुण्य तिथि मनायी जाएगी।
बडी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद
विहिप से जुड़े भारी संख्या में लोगों के कंधमाल पहुंचने की उम्मीद है। यह उनकी 10वीं पुण्य तिथि होगी। वर्ष 1924 में जन्मे संत लक्ष्मणानंद ने प्रारंभ से ही मानव सेवा का रास्ता पकड़ रखा था। हिमालय से तपस्या के उपरांत लौटे स्वामीजी ने 1965 से गौरक्षा आंदोलन से जुड़ गए थे। वनवासी क्षेत्रों में स्वास्थ और संस्कार आधारित शिक्षा में उनका योगदान माना जाता है। कन्या क्षिक्षा, सामूहिक यज्ञ आदि के साथ ही जनजागरण पदयात्राएं वो किया करते थे।
आठ बार हुए जानलेवा हमले
26 जनवरी 1970 को उन पर इसाइयों ने जानलेवा हमला किया था पर वह बच गए थे। इसके बाद उन पर आठ बार जानलेवा हमले हुए थे। 1984 में चकापाद में वीरुपाक्ष पीठ वनक्षेत्र में उन्होंने आश्रम व कन्या पाठाशाल बनाया। वन क्षेत्र में उन्होंने जगन्नाथ यात्रा निकाली जिसमें हजारों वनवासी लोग शामिल हुए थे। हिंदू सनातन धर्म आधारित गतिविधियां गैर हिंदुओं को अखरने लगी थी। उनके अनुयायी बताते हैं कि स्वामी जी धर्मांतरण रोकना चाहते थे।
आश्रम में पुण्यतिथि मनाने का कार्यक्रम
जलेसपट्टा आश्रम में ही पुण्यतिथि मनाने का कार्यक्रम रखा गया है। कंधमाल माओ आतंक प्रभावित जिला माना जाता है। पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह का कहना है कि स्वामी जी हत्या के उपरांत हुए दंगों के कारण यह क्षेत्र अतिसंवेदनशील घोषित किया गया है। नौ प्लाटून अतिरिक्त पुलिस तैनात की गयी है। तीन प्लाटून पुलिस जिला मुख्यालय में तैनात की गयी है। थानों में भी चौकसी बरती जा रही है। जलेसपट्टा आश्रम और चाकपदा में अतिरिक्त फोर्स लगायी गई है।
स्वामी जी के शिष्यों की हत्या के बाद हुई थी बडी हिंसा
2008 में जन्माष्टमी के दिन (23 अगस्त) को स्वामी जी और उनके चार शिष्यों को मार दिया गया था। घटना के बाद कंधमाल सांप्रदायिक हिंसा की आग में धू-धूकर जलने लगा था। कुल 39 लोगों की हत्या हुई और 144 लोगों की हत्या हुई और 1445 घर जला दिए गए थे। इस घटना में बीजू जनता दल के लोगों पर उकसाने का आरोप था। दंगा जांच आयोग ने कथित आरोपियों को छोड़ दिया था। पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह कहते हैं कि हर साल पुण्य तिथि पर एहतियातन सुरक्षा बल लगाए जाते हैं।