बीकानेर

अब बच्चों की अंग्रेजी ‘बोलेगी’… 4 मई से शुरू होगा पठन प्रवाह आकलन

प्रदेश में स्कूल ​शिक्षा को लेकर एक और नवाचार सामने आया है। अब कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों की जांच होगी और शाला दर्पण ऐप से उनकी रीडिंग स्किल नापी जाएगी। इसके साथ ही ​शिक्षा विभाग में शारीरिक ​शिक्षक से लेकर अन्य ​शिक्षा अ​धिकारियों व ​शिक्षकों के पदोन्नति व पदस्थापन को लेकर निर्णय सामने आए है।

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बीकानेर @ पत्रिका. सरकारी स्कूलों में अब अंग्रेजी सिर्फ पढ़ाई नहीं जाएगी, बल्कि बच्चों की बोलने और पढ़ने की क्षमता को भी परखा जाएगा। कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए अंग्रेजी मौखिक पठन प्रवाह (ओरल रीडिंग फ्लूऐंसी) कार्यक्रम 4 से 7 मई तक आयोजित किया जाएगा। इस पहल के तहत विद्यार्थियों की रीडिंग स्किल का आकलन शाला दर्पण शिक्षक ऐप के ओआरएफ मॉड्यूल के माध्यम से किया जाएगा। गौरतलब है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री की ओर से 29 मार्च 2025 को ‘मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान’ की शुरुआत की गई थी। अंग्रेजी विषय में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब इसे पूरे प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में लागू किया जा रहा है।शिक्षकों की तैयारी जरूरी, 1 मई तक मैपिंग अनिवार्य

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सभी संभागीय संयुक्त निदेशकों को निर्देश दिए हैं कि उनके अधीनस्थ शिक्षकों को इस कार्यक्रम की पूरी जानकारी दी जाए। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि विषय शिक्षक मैपिंग 1 मई तक हर हाल में पूरी करनी होगी। मैपिंग नहीं होने पर ओआरएफ मॉड्यूल काम नहीं करेगा। इसकी जिम्मेदारी संबंधित पीईईओ और यूसीईईओ की होगी। कार्यक्रम के दौरान आकलन प्रक्रिया को निर्बाध और पारदर्शी बनाने के लिए पूरी व्यवस्था ऑनलाइन रखी गई है। इससे न केवल बच्चों की वास्तविक क्षमता का आंकलन होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद मिलेगी।

उप जिला शिक्षा अधिकारी (शारीरिक शिक्षा) पद के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया तय

बीकानेर. पदोन्नति के बाद अब पदस्थापन की दिशा में अहम कदम बढ़ाते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने उप जिला शिक्षा अधिकारी (शारीरिक शिक्षा) के पद पर चयनित अधिकारियों के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग कार्यक्रम जारी कर दिया है। वर्ष 2025-26 की विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के तहत प्राध्यापक-शारीरिक शिक्षा/कोच पद से 9 अधिकारियों का चयन किया गया था, जिनके पदोन्नति आदेश 15 अप्रेल को जारी किए गए थे। विभाग की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी। 27 अप्रेल को कार्मिकों की आपत्तियों पर विचार के बाद स्थाई वरीयता सूची का प्रकाशन होगा। 28 अप्रेल को रिक्त पदों की सूची जारी की जाएगी। 29 अप्रेल को अधिकारियों की ओर से विद्यालय/कार्यालय का ऑनलाइन चयन और ऑप्शन लॉक किए जाएंगे।

ऑनलाइन प्रक्रिया से बढ़ेगी पारदर्शिता

इस पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन मोड में संचालित किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों को निर्धारित तिथि पर अपने विकल्प दर्ज कर लॉक करना अनिवार्य होगा, अन्यथा पदस्थापन प्रभावित हो सकता है। पदोन्नति के बाद यह काउंसलिंग प्रक्रिया अधिकारियों के लिए अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसी के आधार पर उनकी नई जिम्मेदारियों और कार्यस्थल का निर्धारण होगा।

डीपीसी के बाद अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी बने कर्मचारी

बीकानेर. शिक्षा विभाग के मंत्रालयिक संवर्ग में लंबे इंतजार के बाद पदोन्नति की सौगात मिली है। वर्ष 2025-26 की डीपीसी में 880 सहायक प्रशासनिक अधिकारियों को अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी पद पर पदोन्नत किया गया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने बताया कि 24 अप्रेल को आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसके तुरंत बाद पदोन्नति आदेश जारी कर दिए गए। सभी पदोन्नत कार्मिकों को 30 अप्रैल तक यथावत कार्यग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। पदस्थापन आदेश अलग से जारी किए जाएंगे।कुछ के लिए रुकी राह, 25 कार्मिकों की पदोन्नति अटकी

डीपीसी में सभी को राहत नहीं मिली। विभिन्न कारणों से 25 कार्मिकों की पदोन्नति फिलहाल रोक दी गई है। इनमें 4 कार्मिकों के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है। 4 कार्मिक जांच में दोषी पाए गए, चयन के लिए अनुपयुक्त पाए गए। 13 कार्मिक चयन तिथि से पहले ही सेवानिवृत्त होने के चलते अयोग्य और 4 कार्मिकों के एसीआर में प्रतिकूल प्रविष्टि के कारण चयन टल गया।

अब काउंसलिंग से पदस्थापन की उठी मांग

पदोन्नति के साथ ही पदस्थापन को लेकर भी मांग तेज हो गई है। शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ ने पदोन्नत अधिकारियों के पदस्थापन शिक्षकों की तरह काउंसलिंग के जरिए करने की मांग उठाई है। संघ के संस्थापक मदन मोहन व्यास ने कहा कि संगठन के निरंतर प्रयासों से ये पदोन्नतियां संभव हो पाई हैं, लेकिन अभी भी कई लंबित मांगें हैं। इनमें 1986 बैच के कर्मचारियों की पदोन्नति, अन्य संवर्गों के बकाया प्रमोशन, काउंसलिंग के माध्यम से पारदर्शी पदस्थापन शामिल हैं। एक साथ बड़ी संख्या में पदोन्नतियों से शिक्षा विभाग के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे कामकाज में तेजी और बेहतर समन्वय की संभावना जताई जा रही है।

Updated on:
25 Apr 2026 11:13 am
Published on:
25 Apr 2026 11:12 am
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