बीकानेर

बीकानेर के इस भामाशाह ने की रानी लक्ष्मीबाई की मदद, राजद्रोह में मिली फांसी की सजा

बीकानेर के अमर चंद बांठिया ग्वालियर राज के खजाने गंगाजली के थे कोषाध्यक्ष रानी लक्ष्मीबाई व तांत्या टोपे की मदद की  
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Jun 22, 2022
बीकानेर के इस भामाशाह ने की रानी लक्ष्मीबाई की मदद, राजद्रोह में मिली फांसी की सजा
बीकानेर के इस भामाशाह ने की रानी लक्ष्मीबाई की मदद, राजद्रोह में मिली फांसी की सजा

सन् 1857 के स्वाधीनता संघर्ष का गौरवान्वित इतिहास है। देश के क्रान्तिवीरों में उस दौर में अंग्रेजी शासन से मुक्ति और आजादी की ललक थी। क्रान्तिवीरों ने अंग्रेजी शासन से मुक्ति के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणो को न्यौछावर किया। इन्ही क्रान्तिवीरों में शामिल थे बीकानेर में जन्मे और ग्वालियर रियासत के खजाने के कोषाध्यक्ष रहे अमर चंद बांठिया। रानी लक्ष्मीबाई और तांत्या टोपे को धन उपलब्ध करवाने और मदद के लिए अंग्रेजी शासन ने बांठिया पर राजद्रोह का आरोप लगाकर सरेआम नीम के पेड़ से इनको फांसी की सजा दी गई।

खजाने से उपलब्ध करवाया धनस्वतंत्रता संग्राम का पहला शहीद बीकानेर का क्रान्तिवीर भामाशाह अमर चंद बांठिया पुस्तक के सह सम्पादक डॉ. धर्मचन्द्र जैन के अनुसार अंग्रेजो से संघर्ष के दौरान जब रानी लक्ष्मीबाई और तांत्या टोपे को अपने सैनिकों के मासिक वेतन और राशन-पानी के लिए धन की जरुरत पड़ी तो अमर चंद बांठिया ने अपनी जान की परवाह किए बगैर गंगाजली खजाने से धन उपलब्ध करवाया। यहीं नहीं अपना धन भी रानी लक्ष्मीबाई व तांत्या टोपे को समर्पित कर दिया था।

सरेआम फांसी की सजा

राज के खजाने से रानी लक्ष्मीबाई व तांत्या टोपे को धन उपलब्ध करवाने से अंग्रेजी शासन नाराज हो गया। डॉ. धर्मचन्द्र जैन के अनुसार 18 जून 1858 को रानी लक्ष्मीबाई की शहादत के बाद अंग्रेजी शासन ने अमर चंद बांठिया को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। न्याय का नाटक रचने के बाद ब्रिगेडियर नैपियर ने लश्कर के सराफा बाजार में 22 जून 1858 को नीम के पेड़ से बांठिया को फांसी की सजा दिलवा दी। जैन के अनुसार बताया जा रहा है कि बांठिया का शव तीन दिन तक पेड़ से ही लटका रहा।

बीकानेर से गए थे ग्वालियर

डॉ. चक्रवती नारायण श्रीमाली के अनुसार अमर चंद बांठिया बीकानेर निवासी अबीर चंद बांठिया के पुत्र थे। अमर चंद बांठिया का जन्म सन् 1793 में हुआ था। बांठिया के पूर्वज व्यापार के लिए ग्वालियर रियासत में गए थे। अमर चंद बांठिया के ग्वालियर में रहने के दौरान ग्वालियर महाराजा को अमर चंद बांठिया की प्रतिभा, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की जानकारी मिलने के बाद अपने अकूत धन से भरे गंगाजली खजाने का कोषाध्यक्ष बनाया।

ग्वालियर में प्रतिमा स्थापित, बीकानेर में तैयारी

भामाशाह व शहीद अमर चंद बांठिया की मूर्ति उसी लश्कर इलाके के सर्राफा बाजार में िस्थत नीम के पेड़ के नीचे स्थापित है, जिस पर उन्हे फांसी की सजा दी गई थी। डॉ. जैन के अनुसार यह प्रतिमा हजारी मल बांठिया ने स्थापित करवाई। बीकानेर में मेडिकल कॉलेज चौराहा के पास डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मंदिर परिसर में अमर चंद बांठिया की मूर्ति स्थापित की जाएगी। शहीद अमर चन्द बांठिया स्मृति प्रन्यास के संयोजक संतोष बांठिया के अनुसार अष्टधातु से निर्मित प्रतिमा तैयार है। फाउण्डेशन तैयार हो चुका है।

Published on:
22 Jun 2022 08:12 pm
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